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शराबबंदी के बाद बिहार की पहली होली पुलिस के लिए चुनौती

पटना। बिहार में 5 अप्रैल, 2016 को पूर्ण शराबबंदी की घोषणा के बाद पहली होली करीब है। शराब तस्कर इसे बड़ी कमाई का मौका मान रहे हैं। तस्करों की सक्रियता पर नकेल कसने के लिए पुलिस महकमे की कसरत भी बढ़ गयी है।

पिछले 15 दिनों में बड़ी मात्रा में शराब की खेप पकड़ी गयी है। इस दौरान राज्यभर में करीब 10 हजार लीटर शराब की बरामदगी की जा चुकी है। इस वर्ष जनवरी से अब तक लगभग 30 हजार लीटर अवैध शराब बरामद की जा चुकी है। बिहार के लोगों के लिए यह पहला मौका होगा, जब वह बिना शराब के ही होली में रंग जामेगा।

खुफिया सूचनाओं के आधार पर शराब की खेपों के साथ तस्करों को दबोचने में आसानी हो रही है। होली के पहले पुलिस महकमे ने राज्य के सभी थानों को अलर्ट कर दिया है।

अब तस्कर आलू, गिट्टी, सब्जी समेत सामान के बीच विदेशी शराब के कार्टूनों को छिपाकर लाते हैं। तस्करी के इस कारोबार के लिए पूरा एक रैकेट तैयार हो गया है, जिसका जाल राज्य के बाहर और अंदर तक फैला हुआ है।

तस्करों ने झारखंड के कोडरमा, रजौली समेत अन्य सीमावर्ती जिलों तथा यूपी के दिलदार नगर, मुगलसराय के नजदीक, करनौती नदी के उस पार बिहार सीमा से सटे कई स्थानों पर शराब छिपाने का ठिकाना बना लिया है।

इन ठिकानों पर बड़े स्तर पर विदेशी शराबों को छिपाकर डंप करके रखा गया है। इसके बाद इनकी सप्लाई छोटे-छोटे वाहनों में फल, सब्जी, गिट्टी, आलू समेत अन्य सामान के साथ बिहार में की जा रही है। पड़ोसी राज्यों के रास्ते शराब की तस्करी के काफी मामले भी सामने आये हैं।

इस तरह की अधिकांश शराब झारखंड के रास्ते बिहार आ रही है। ऐसी शराब की दो बड़ी खेप को एसटीएफ ने 31 जनवरी को बेगूसराय के पास और 3 फरवरी को बांका जिला के बौंसी थाना क्षेत्र में जब्त किया था।

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