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शरीयत के ख़िलाफ़ निकात को वक़्फ़ एक्ट से हज़फ़ करने का मुतालिबा

शेखुल जामिआ निज़ामीया मौलाना मुफ़्ती खलील अहमद ने कहा कि वक़्फ़ एक्ट में शामिल कई उमूर शरीयत से टकराते हैं लिहाज़ा हुकूमत को चाहीए कि वो वक़्फ़ एक्ट से ऐसे निकात को हज़फ़ करदे जो शरीयत के ख़िलाफ़ हों। आज अख़्बारी नुमाइंदों से बात चीत कर

शेखुल जामिआ निज़ामीया मौलाना मुफ़्ती खलील अहमद ने कहा कि वक़्फ़ एक्ट में शामिल कई उमूर शरीयत से टकराते हैं लिहाज़ा हुकूमत को चाहीए कि वो वक़्फ़ एक्ट से ऐसे निकात को हज़फ़ करदे जो शरीयत के ख़िलाफ़ हों। आज अख़्बारी नुमाइंदों से बात चीत करते हुए मुफ़्ती खलील अहमद ने कहा कि शरीयत में दीगर क़्वानीन के तहत वक़्फ़ भी एक मुस्तक़िल क़ानून है।

अगर कोई शख़्स अपनी ज़ाती जायदाद को नेक मक़सद के लिए वक़्फ़ करदे तो ये ताहयात वक़्फ़ रहती है। हुकूमत और किसी ओहदेदार को मंशा-ए-वक़्फ़ में तबदीली का कोई अख़्तियार नहीं।

उन्हों ने वज़ाहत की कि शरीयत के मुताबिक़ वाक़िफ़ को ये अख़्तियार हासिल है कि वो मुतवल्ली मुक़र्रर करे। और मुतवल्ली का ताल्लुक़ वाक़िफ़ के ख़ानदान से ही होता है। उन्हों ने कहा कि मुतवल्ली किसी का मातहत नहीं होता और उसे सरकारी मुलाज़िम की तरह रखने या निकालने का वक़्फ़ बोर्ड को कोई अख़्तियार नहीं। हुकूमत मंशा-ए-वक़्फ़ की पाबंद होती है।

अगर किसी इदारा में क़वाइद की ख़िलाफ़वर्ज़ी पाए जाए तो वक़्फ़ बोर्ड उसे दरुस्त कर सकता है। मुफ़्ती खलील अहमद ने कहा कि गलतियों की इस्लाह करना तो ठीक है लेकिन इस्लाह के नाम पर फ़साद पैदा करना मुनासिब नहीं। अगर वक़्फ़ बोर्ड इस्लाहात का तरीकेकार अख़्तियार करना चाहे तो उल्माए किराम तआवुन के लिए तैयार हैं।

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