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शरीयत नहीं, मानसिकता बदलने की जरुरत : इमाम उमर इलयासी

मुस्लिम धर्मगुरु इमाम उमर इलयासी ने बुधवार को कहा कि शरीयत कानून नहीं बल्कि मानसिकता बदलने की जरूरत है। उनका यह बयान जमीयत उलेमा हिंद के नेतृत्व में मुस्लिम समुदाय के 25 मौलानाओं की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से हुई मुलाकात के बाद आया है।

 

 

 

उन्होंने कहा, यह मामला बहुत गंभीर हो गया है। अब लगता है कि हमें कुछ तय करना होगा। जुलाई के पहले सप्ताह में हमने अखिल भारतीय इमाम संगठन की बैठक आयोजित करने का निर्णय लिया है जिसमें हम इस मामले पर चर्चा करेंगे। हम मानते हैं कि कहीं इसका दुरुपयोग हुआ है और इस पर चिंता करने की हमारी ज़िम्मेदारी है।

 

 

 

महिलाओं के अधिकार केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं हैं, बल्कि समाज के भी हैं। लोगों की मानसिकता को बदलने की आवश्यकता है, शरीयत नहीं। इन नेताओं के प्रतिनिधिमंडल का स्वागत करते हुए राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल ने कहा था कि पूरी दुनिया भारत की तरफ देख रही है और यह कि भारतीय समाज के सभी वर्गों की जिम्मेदारी देश को आगे बढ़ाने के लिए है।

 

 

 

 

 

प्रतिनिधिमंडल के सदस्यों ने डोभाल से सहमति व्यक्त की। प्रधानमंत्री से मुलाक़ात की प्रशंसा करते हुए प्रतिनिधिमंडल के सदस्यों ने आशा व्यक्त की कि वे समाज के सभी क्षेत्रों की समृद्धि और कल्याण सुनिश्चित करेंगे। उन्होंने तीन तलाक़ के मुद्दे पर प्रधानमंत्री मोदी के रुख कीसराहना की।

 

 

 

 

प्रतिनिधिमंडल के सदस्य जो शैक्षिक संस्थानों से भी जुड़े हुए हैं, ने सरकार की नकद रहित लेनदेन, स्टार्ट-अप आदि पहल का उल्लेख किया। प्रधानमंत्री ने पहले ही दोहराया कि मुस्लिम समुदाय को इस मुद्दे को राजनीति में घसीटने की इजाजत नहीं दी जानी चाहिए और इसमें सुधार की शुरुआत करने की जिम्मेदारी लेने का सभी से आग्रह किया गया।

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