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शरीयत में हस्तक्षेप पर संसद का घेराव करने की मजलिस बचाओ आंदोलन ने दी चेतावनी

हैदराबाद 29 अक्टूबर:अंबेडकर के दस्तूर को सावरकर के नज़रियाती दस्तूर में बदलने की कोशिश सरकार की ओर से की जा रही हे.दस्तूर में संपादित की गुंजाइश है लेकिन कोई शक्ति देश के नागरिकों के बुनियादी हुक़ूक़ मे‍ं मुदाख़िलत नहीं कर सकती।

आलमी सतह पर महिला को सम्मान की निगाह से देखने की शिक्षा इस्लाम ने दी और इस्लाम ही के क़वानीन ने औरत को समान अधिकार और समाज में सम्मान तकरीम संपन्न की.भारत के प्रधान की पत्नी जसोदा बेन देश में सन्निहित मज़लूमियत बनी हुई है इसके न्याय कौन करेगा?

मजलिस बचाओ आंदोलन ज़ेरे एहतेमाम आयोजित सभा तहफ़्फ़ुज़ शरीयत को संबोधित के दौरान वक्ताओं ने इन विचार का व्यक्त किया। डॉक्टर हफीज रहमान (दिल्ली) श्री मजीद अल्लाह ख़ान फरहत सदर मजलिस बचाओ आंदोलन ‘श्री अमजअल्लाह खान खालिद प्रवक्ता आंदोलन के अलावा अन्य वक्ताओं ने इस जलसे को संबोधित करते हुए सरकार को शरीयत में हस्तक्षेप की कोशिश पर सख़्त नताइज की चेतावनी देते हुए कहा कि अगर सरकार शरीयत में हस्तक्षेप करने की कोशिश करती है तो ऐसी स्थिति में देश के 20 करोड़ मुसलमान संसद का घेराव करने से भी परहेज नहीं करेंगे। श्री मजीद उल्लाह खान फरहत ने कहा कि पैगम्बर हजरत मुहम्मद (सल्लललाहु अलैहि वसल्लम) ने जो कानून जीवनशैली दुनिया को दिया है उसी जीवन शैली ने इन्सान को इंसान बनाया। इन क़वानीन में तरमीम कोई बर्दाश्त नहीं कर सकता ।

उन्होंने बताया कि दस्तूर की दफ़ा 44 पर मबाहिस को डाक्टर बी आर अंबेडकर ने उसी वक़्त ये कहते हुए ख़त्म कर दिया कि कसीर तहज़ीबी मुल्क में यकसाँ सियोल कोड का नफ़ाज़ किसी भी तरह मुम्किन नहीं बनाया जा सकता।मजीद अल्लाह ख़ान फ़र्हत ने कहा कि नरेंद्र मोदी बात कर रहे हैं ख़वातीन के साथ नाइंसाफ़ीयों की तो उन्हें सबसे पहले अपनी पत्नी को इन्साफ़ देना चाहीए।

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