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शहर में खुले आम नशा , गांजा और नशीली अशिया- बा आसानी दस्तयाब !!

नुमाइंदा ख़ुसूसी शहर हैदराबाद में नशा की इंतिहाई ख़तरनाक और बुरी आदत बड़ी तेज़ी से फैल रही है और हैरत तो इस बात पर है कि इस जान लेवा लत में इस तबक़ा की अक्सरियत भी मुलव्विस है । जिन के पास ना रहने का ठिकाना और ना खाने की कोई चीज़ है ।

नुमाइंदा ख़ुसूसी शहर हैदराबाद में नशा की इंतिहाई ख़तरनाक और बुरी आदत बड़ी तेज़ी से फैल रही है और हैरत तो इस बात पर है कि इस जान लेवा लत में इस तबक़ा की अक्सरियत भी मुलव्विस है । जिन के पास ना रहने का ठिकाना और ना खाने की कोई चीज़ है । फ़िक्रा-की अक्सरियत आज शराब , गांजा और दीगर नशीली अशिया-की आदी होचुकी है और इस फ़हरिस्त में ख़वातीन गदागर मर्दों से पीछे नहीं है । चुनांचे अच्छी ख़ासी सूरत की एक नौजवान लड़की को हम ने देखा कि अपनी ओढ़नी के पल्लू में कुछ सफेद रंग का माद्दा डाले अपनी नाक के नथनों को इस की सतह पर रखे ज़ोर ज़ोर से सांस अंदर की जानिब खींच रही है ।

वो इस तरह सांस खींचती जाती और मदहोशी में लुढ़कती जाती , कुछ देर तक वो एसे ही सांस अंदर की जानिब खींचती रही और फिर सड़क की एक जानिब बंद दुकान के चबूतरे पर उसे बैठ गई जैसे वो इस दुनिया से किसी और दुनिया में पहुंच गई हो । उसे ना तो अपने लिबास का ख़्याल था और ना ही इस ओढ़नी की कोई ख़बर थी जो इस के नशा में धुत वजूद से कुछ दूर पड़ी ज़मीन की ख़ाक चाट रही थी । इस लड़की से दो-चार क़दम पर एक 40 ता 45 साल का शख़्स सिगरेट को ख़ाली करते हुए इस में कुछ भरकर सिगरेट जलाता । मदहोशी में लड़की के बिलकुल करीब जाकर बैठ जाता । ये मुनाज़िर अगरचे हमारे शहर में आम हो चुके हैं , लेकिन हम ने उसे कोटला आलीजाह सड़क के एक जानिब बंद मिलगियों के चबूतरे पर देखा और दंग रह गए कि किस बेख़ौफ़ी से ये लोग नशा कररहे हैं ।

ज़राए से इस बात की इत्तिला मिली थी कि कोटला आलीजाह , मीर आलम मंडी रोड पर गदागर मर्द-ओ-ख़वातीन और नौजवान लड़कियां हता कि कमसिन बच्चे भी नशा के लिए जमा होते हैं । लिहाज़ा हम ने वहां पहुंच कर एक दुकान में बैठ कर इस सारे मंज़रको रेकॉर्ड किया और तसावीर भी लीं । अवाम को इस तरह के अनासिर से वाक़िफ़ कराने के मक़सद के तहत हम ने मज़ीद छान बीन की तो पता चला कि गदागर ख़वातीन और नौजवान लड़कियां बड़े पैमाने पर इस तरह का नशा कर रही हैं । इस तरह के वाक़ियात अक्सर ट्रैफिक सिग्नलों , बस स्टपस , चारमीनार के अतराफ़-ओ-अकनाफ़ सड़कों की फुटपाथों , कोटला आलीजाह , कंचन बाग़ , चादर घाट और बशीर बाग़ जैसे मुक़ामात पर देखने में आरहे हैं ।

अफ़सोस तो इस बात पर है कि हम बड़ी रहम दिली के साथ ट्रैफिक सिग्नलों पर गदागर के हाथों में पैसे थमा देते हैं और ये सोच कर मुतमइन होजाते हैं कि हम ने एक गरीब की मदद की । मगर दर हक़ीक़त हम नशा के लिए उन के हाथों में पैसे थमाते हैं । पूरे वसूक़ से कहा जा सकता है कि इन में 90 फीसद लड़कियां नशा की लतमें मुबतला हैं । और ख़ास कर रात के औक़ात में जब ये नशा कर के मदहोश होजाती हैं। आप को बतादें कि शहर में नशा आवर अशिया-ख़ासकर गांजा गदागरों और इस लत में मुबतला अफ़राद को बा आसानी दस्तयाब होता है । हम ने कुछ देर के लिए नशा के आदी इन मर्दों और लड़कियों पर नज़र रखी तो देखा कि अचानक एक हटा कटा नौजवान मोटर साइकल से वहां पहुंचा ।

ज़ईफ़ शख़्स के हाथ में पाकेट थमाते हुए रक़म हासिल की और चला गया और वहां जाने से कब्ल नशा कररही लड़की से गाली गलौज की । इस की फटकार सुनते ही वो वहां से रफू चक्कर होगई । हम ने शहर में देखा कि जहां भी लड़कियां भीक मांग रही हैं वो अपने मुक़ाम से हट कर कुछ देर नशा करती हैं फिर भीक मांगने लगती हैं । नशा के आदी लड़कों , लड़कियों और मर्द-ओ-ख़वातीन गदागरों की तादाद में इज़ाफ़ा के बावजूद पुलिस की ख़ामोशी हैरतनाक कही जा सकती है । तहक़ीक़ से मालूम हुआ कि शहर में गांजा के पेयाकिट्स बा आसानी दस्तयाब होजाते हैं । हत्ता कि तलब करने वाले के मुक़ाम पर लाकर पहुंचाया जाता है ।

फिर भी पुलिस ख़ामोश है इस पर सिर्फ अफ़सोस के और कुछ नहीं किया जा सकता । कुछ दिन कब्ल हम ने एक पुलिस कांस्टेबल को एक स्कूटर रां का बड़ी तेज़ी से तआक़ुब करते हुए देखा और इस बहादुर दिलेर पुलिस कांस्टेबल ने बड़ी मेहनत से इस को पकड़ लिया । हम ने करीब पहुंच कर सुना तो जो अलफ़ाज़ इस कांस्टेबल ने अदा किये इस से अंदाज़ा होगया कि नशा आम क्यों होरहा है । इस ने स्कूटर सवार से कहा : हमारे इलाक़ा से माल ले जा रहा है और हमारा ख़्याल नहीं । स्कूटर रां जो पहले ख़ौफ़ में मुबतला था फ़ोरन मुस्कुराते हुए जेब में हाथ डाला और बड़ी अपनाईयत से कांस्टेबल से हाथ मिलाया और चलता बिना ।

कुछ दिन कब्ल भी कंचन बाग़ से दफ़्तर सियासत को इत्तिला मिली कि यहां गदागर मर्द-ओ-ख़वातीन शराबनोशी कर रही हैं हम ने जब वहां पहुंच कर देखा तो आंखें फटी की फटी ही रह गई वहां गदागर ख़वातीन बड़े आराम से शराबनोशी में मसरूफ़ थीं उन के इलावा आम ख़वातीन भी वहां नज़र आइं । बहरहाल पुलिस इंतिज़ामीया को चाहीए कि मुआशरा को इस तरह की बुराईयों से साफ़ करने केलिए आगे आए और उन अनासिर के ख़िलाफ़ सख़्त कार्यवाहीयां की जाएं । इस के साथ अवाम को सालेह मुआशरा की तशकील के लिए बेदारी का सबूत देने की अहम ज़रूरत है जहां कहीं एसे अफ़राद नज़र आएं फ़ौरी महकमा पुलिस को इत्तिला दी जाय ताकि बरवक़्त उन के ख़िलाफ़ कार्रवाई की जा सके ।।

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