Friday , October 20 2017
Home / Hyderabad News / शहर में बड़े पाइप भी ग़रीबों का मस्कन

शहर में बड़े पाइप भी ग़रीबों का मस्कन

नुमाइंदा ख़ुसूसी -हिंदूस्तान भर में बेघर इंसानों की इतनी बड़ी तादाद है कि इन का तक़ाबुल यूरोप के कई छोटे ममालिक के साथ किया जा सकता है । तेज़ी के साथ हैदराबाद शहर भी कासमोपोलीटन शहर बनता जा रहा है । हैदराबादी तहज़ीब तो अब एक लिहाज़ से

नुमाइंदा ख़ुसूसी -हिंदूस्तान भर में बेघर इंसानों की इतनी बड़ी तादाद है कि इन का तक़ाबुल यूरोप के कई छोटे ममालिक के साथ किया जा सकता है । तेज़ी के साथ हैदराबाद शहर भी कासमोपोलीटन शहर बनता जा रहा है । हैदराबादी तहज़ीब तो अब एक लिहाज़ से गुमबद क़ुतुब शाही के वीरानों में या फिर क़िला गोलकुंडा की उजड़ी हुई इमारतों ही में महिदूद होती जा रही है । हैदराबाद की बदलती हुई सूरत-ए-हाल कोई अजूबा की बात नहीं ।

जिस शहर में भी मसावी तरक़्क़ी होती है वहां अख़लाक़ी गिरावट ख़ुद बह ख़ुद अपनी राह बना लेती है । बेघरी , बेरोज़गारी , बेसर-ओ-सामानी आपस में बहनें हैं । हमारे शहर में भी रिहायशी सहूलतों से महरूम अफ़राद की तादाद में रोज़ अफ़्ज़ूँ इज़ाफ़ा होरहा है जिस की वजह से बेघर इंसान फुटपाथों , मुख़्तलिफ़ दुकानों के शेड्स , सड़क के बेचों बीच वाक़्य ट्रैफ़िक , आयलैंड्स ग़रज़ जहां जगह मिल जाय सो जाते हैं । कई मज़दूर अपनी रात इसी तरह गुज़ारते हैं । कई फ़िक्रा-ए-भी ऐसी ही रातें गुज़ारते हैं । उन्हें ना बिस्तर की ज़रूरत होती है ना किसी चादर की ।

इन के जिस्म , लिबास से पूरी तरह ढाँके नहीं जा सकते बल्कि उन के जिस्म ख़ुद लिबास में से झांकते रहते हैं । बे घरों की उफ़्ताद कोई नई बात नहीं है । ज़ेर नज़र तस्वीर में आप एक शख़्स को जो बेघर है सिटी कॉलिज के पास एक बड़े पाइप में रात गुज़ारते हुए देख सकते हैं । इस ग़रीब को छत नसीब नहीं है ।ये मज़दूर , ये ग़रीब वो लोग हैं जो इंतिख़ाबात में लंबी लंबी क़तारों में खड़े हो कर वोट देते हैं । सवाल ये है कि इस जमहूरीयत ने उन्हें क्या दिया । हुकूमतें बनती रही बिगड़ती रही , बदलती रही लेकिन अफ़सोस कि इन बे घरों को किसी ने घर या सहारा नहीं दिया ।

इस पर भी ये ख़ुश है । ये वो मज़दूर हैं जो कहीं भी शब बसरी करलेते हैं । उन्हें किसी चीज़ की ना तो कमी महसूस होती है और ना ये बेचारे कभी कोई शिकवा करते हैं जहां जगह मिली बसेरा करलेते हैं : सो जाते हैं फुटपाथ पे अख़बार बिछा कर मज़दूर कभी नींद की गोली नहीं खाती हुकूमत को चाहीए कि वो ऐसे बेघर-ओ-बेसहारा , लोगों के लिए आसरा फ़राहम करने ठोस इक़दामात करे ।।

TOPPOPULARRECENT