Wednesday , October 18 2017
Home / Hyderabad News / शहीद मस्जिद क़ुतुब शाही पर हज़ारों अफ़राद ने नमाज़ जुमा अदा की

शहीद मस्जिद क़ुतुब शाही पर हज़ारों अफ़राद ने नमाज़ जुमा अदा की

हैदराबाद 21 जनवरी अब्बू एमल- एक अर्सा तक सजदों से महरूम शहीद क़ुतुब शाही मस्जिद में फ़रज़दाने तौहीद ने अपनी जबीन नयाज़ ख़म के हुज़ूर जुमा का दोगाना अदा किया और इमानी हरारत , देनी हमीयत और शअइर इस्लाम के तइ पुरजोश जज़बे का सबूत पेश क

हैदराबाद 21 जनवरी अब्बू एमल- एक अर्सा तक सजदों से महरूम शहीद क़ुतुब शाही मस्जिद में फ़रज़दाने तौहीद ने अपनी जबीन नयाज़ ख़म के हुज़ूर जुमा का दोगाना अदा किया और इमानी हरारत , देनी हमीयत और शअइर इस्लाम के तइ पुरजोश जज़बे का सबूत पेश किया । आबादी शहर से दूर पहाड़ के दामन में वाक़ै वसीअ-ओ-अरीज़ चटियल मैदान में इस्लाम के नौनिहालों का ठाठें मारता समुंद्र नज़र आरहा था । सैले रवां की तरह दूर दराज़ ख़तों से अहल इमान चले आरहे थे । एक अर्सा बाद अज़ान की बुलंद-ओ-बाँग सदा , तिलावत क़ुरआन की दिलकश गूंज , रुकवा-ओ-सुजूद का दिलफरेब मंज़र इस सरज़मीन को देखने को मिला , तक्बीर इलहा से प्यासी ज़मीन को एक तवील अर्सा बाद सैराबी हासिल हुई ।

हज़ारों की तादाद में फ़रज़दाने इस्लाम के रुकवा-ओ-सुजूद का ख़ूबसूरत और हुसैन नज़ारा क़ाबिल दीद था । शायद ही कभी अल्लाह के इस घर में इस से क़बल इतनी कसीर तादाद में अहल इमान ने अपनी पेशानी ख़म की हो । एक मुद्दत से अपने जानिसारों से बिछुड़ी हुई मस्जिद को इस वक़्त क़रार आया जब हज़ारों कलिमागो इमान वालों ने भारी इजतिमाईयत के साथ 2 बजे नमाज़ जुमा अदा की । सफेद टोपियां , सफेद पोशाक , वसीअ-ओ-अरीज़ मैदान और इतनी बड़ी जमीत बिलकुल मीर आलिम ईदगाह का मंज़र नज़रों के सामने आरहा था । नमाज़ जुमा की इमामत के फ़राइज़ जनाब हाफ़िज़ मुहम्मद अबदुल वहाब नायब इमाम मस्जिद हज हाउज़ ने अंजाम दिए ।

वक़्फ़ बोर्ड ने बाज़ाबता तौर पर इमामत केलिए इन का तक़र्रुर किया । मस्जिद-ओ-अतराफ़ में 12 बजे तक तमाम इंतिज़ामात मुकम्मल करलिए गए थे । मैदान साफ़ सुथरा और मुसत्तह करके वसीअ पैमाने पर मुस्लियों की सहूलत केलिए जाएनमाज़ और शुत्रनिजीयाँ बिछाई गई थी । वुज़ू केलिए पानी का इंतिज़ाम टैंकरों के ज़रीया किया गया था और मख़सूस हज़रात ने रज़ाकाराना तौर पर पानी और बिस्कुट के पैकेटस का बहतरीन नज़म किया था । हर आने वाले को पानी और बिस्कुट का पैकट पेश किया गया । मुस्लियों की आमद का सिलसिला 12 बजे से ही शुरू होगया था । कसीर तादाद में लोगों की आमद को देखते हुए जमात का वक़्त 1.30 बजे से बढ़ाकर 2 बजे कर दिया गया था ।

शहर के कोना कोना से परवानावार , देनी जज़बा से सरशार जौक़ दर जौक़ उम्मत मुहम्मदिया के गयुर जयाले चले आरहे थे । क्या बूढ़े , क्या बच्चे और क्या नौजवान सब मौज दर मौज उमंड पड़े । 2 व्हीलरज़ , 4 व्हीलरज़ , आटो रिक्शा और ज़ाती गाड़ियों से आने वालों का रेला था । पार्किंग केलिए दो जगहें मुक़र्र करदी गई थी । तमाम पेश क़ियासयों को ग़लत साबित करते हुए वहम-ओ-गुमान से बालातर इमान वालों की भारी जमीत यहां टूट पड़ी जिन्हें देख कर मुंतज़मीन और पोलीस अमला दाँतों तले उंगलियां काटने लगे । इमाम साहिब ने शहीद मस्जिद के मलबा पर ही नमाज़ पढ़ाई जब कि मुस्लियों की तादाद बहुत दूर तक फैली हुई थी ।

इस मौक़ा पर रियापड एक्शन फ़ोर्स की भारी तादाद मुतय्यन करदी गई थी और पहाड़ी शरीफ पोलीस इन्सपैक्टर टी गवर्धन , जो यौम शहादत से ही यहां ड्यूटी अंजाम दे रहे थे मौजूद थे ।हिफ़ाज़ती बनदोसत ए सी पी सिरे निवास शमस आबाद की निगरानी में किया गया । काबिल-ए-ज़िकर अमर ये है कि वालेनटरज़ की टीम इंतिज़ामीया की जानिब से तशकील दी गई थी जो बारकस के करीब से ही आने वालों को मुक़ाम मस्जिद तक रहनुमाई केलिए थोड़े थोड़े फ़ासले से हाथों में सबज़ रंग के झंडे लिए खड़े थे । ये मंज़र भी लायक़ दीद था । उन्हों ने बहतरीन अंदाज़ में ये कार्रवाई अंजाम दी कि वहां मौजूद पोलीस अमला भी हैरत में पड़ गया कि इतनी कसीर तादाद बगैर किसी नोक झोंक के सुकून के साथ नमाज़ अदा करके चली गई ।

नीज़ अवाम तक आवाज़ पहूँचाने लाउड स्पीकर का ख़ास नज़म किया गया था । नमाज़ से क़बल इमाम साहब ने इस्लाम में मसाजिद की अहमियत और गैर आबाद मसाजिद के ताल्लुक़ से मुस्लमानों की ज़िम्मा दारीयों पर रोशनी डालते हुए क़ुरआन-ओ-हदीस के हवाले के साथ मुख़्तसर मगर जामे ख़िताब किया जिस में आप ने फ़रमाया कि वो मसाजिद और अल्लाह का घर और दुनिया की सब से बहतरीन जगह है ।मसाजिद की तामीर इस्लामी फ़रीज़ा है । अफ़सोस का मुक़ाम है कि ख़ुद हमारे मुस्लमानों के हाथों ये मस्जिद ज़मीन दोज़ करदी गई । फ़ानी दुनिया की ख़ातिर आख़िरत के लाज़वाल अज़ाब को उन्हों ने अपने गले लगा लिया । उन्हों ने कहा कि मुस्लमानों को चाहीए कि मसाजिद की आबाद कारी केलिए पहले अपने मुहल्ला की मस्जिद में नमाज़ अदा करना शुरू करें ।

मसाजिद की आबादी नमाज़ों के ज़रीया है बुलंद-ओ-बाला और ख़ूबसूरत इमारात के ज़रीया नहीं । बाद नमाज़ इमाम साहिब ने रिक्त अंगेज़ दुआ की , दौरान दा-ए-मुस्लियों की आंखें नम होगई । सब ने दिल की गहिराईयों से अल्लाह के हुज़ूर में दुआ मांगी और इमाम साहब ने मुक़ामी लोगों को मुबारक बाद दी कि इस क़दर कसीर मजमा यहां जमा हुआ ये तमाम लोग क़ाबिल मुबारकबाद हैं । जो पूरे शहर से दूर दराज़ इलाक़ों से यहां आए हैं अल्लाह उन्हें अज्र अज़ीम अता करेगा । सुंतों से फ़राग़त के बाद सरवर-ए-कायनात सरकार दो आलम , आक़ा (स) की बारगाह रिसालत मआब में नज़राना सलाम पेश किया गया और तमाम मसालिक , अक़ाइद और तबक़ात के अफ़राद ने कंधे से कंधा मिलाकर नमाज़ अदा की ।

अगर एसा ही इत्तिहाद हमेशा पेश किया जाता रहे तो इस के अच्छे नताइज ज़ाहिर होंगे । नमाज़ के बाद हज़ारों का मजमा पुरअमन तरीका से घरों को लूट गया । वाज़ेह रहे कि जब नामा निगारों ने अंतता मेह से उन के नाम पूछे तो उन का जवाब था हम अल्लाह के बंदे हैं , अल्लाह केलिए काम कर रहे हैं , नाम-ओ-नमूद से किया हासिल । वक़्फ़ बोर्ड एगज़ेकेटेव ऑफीसर जनाब शबर पाशाह मीडिया के नुमाइंदों से मुख़ातब होते हुए कहा कि अल्हम्दुलिल्ला भारी अक्सरियत में लोगों ने नमाज़ अदा करके मीर आलिम ईदगाह की ईद की नमाज़ का मंज़र ताज़ा कर दिया । उन्हों ने कहा कि ये मस्जिद शहंशाहों की बनाई हुई सदियों पुरानी थी और ये दर्ज वक़्फ़ है । वक़्फ़ बोर्ड ने इस की तमाम ज़िम्मा दारियां अपने ज़िम्मा ली हैं ।

इसका तामीरी काम जल्द शुरू होजाएगा । दूर दराज़ से आए हुए हज़रात ने नमाज़ के बाद कुछ देर तक शहीद मस्जिद का मुकम्मल मुआइना किया । वाज़ेह रहे कि सियासत अख़बार में महफ़ूज़ मस्जिदकी माक़बल इन्हिदाम की तस्वीर भी आवेज़ां थी , जिसे देख कर अवाम ने ताज्जुब का इज़हार किया । नीज़ मुजरमीन की जानिब से किया जा रहा ग़लत प्रोपगंडा कि मस्जिद ख़स्ता हालत में थी , ये तस्वीर नफ़ी करती है इस में वाज़िह तौर पर मालूम हो रहा है कि मस्जिद बहुत मज़बूत-ओ-मुस्तहकम हालत में थी । इस मौक़ा पर जनाब आमिर अली ख़ान न्यूज़ एडीटर सियासत , उसमान अलहाजरी , उम्र वहलान , मुहम्मद शकील ऐडवोकेट , तारिक़ कादरी ऐडवोकेट , मक़बूल अलहाजरी , ताहिर अफ़ारी , मुहम्मद अनवर शरीफ नगर , शरीफ मुहम्मद यमानी , अबदुलसत्तार मुजाहिद , मुहम्मद यूसुफ़ सी पी आई तय्यब ख़ालदी के इलावा बारकस-ओ-शाहीन नगर के मुअज़्ज़िज़ हज़रात मौजूद थे ।

TOPPOPULARRECENT