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शादीयों में इसराफ़ और ग़ैर ज़रूरी रसूमात से इजतिनाब पर ज़ोर

जनाब ज़ाहिद अली ख़ां एडीटर सियासत ने आज एलान किया कि वालिदेन-ओ-सरपरस्तों की नुमाइंदगी पर इदारा सियासत-ओ-एम डी एफ़ की तरफ से हर इतवार को ख़ुसूसी दु बद्दू मुलाक़ात प्रोग्राम मुनाक़िद किया जाएगा, जिस में एक ही ज़ुमरे के पयामात की निशानदे

जनाब ज़ाहिद अली ख़ां एडीटर सियासत ने आज एलान किया कि वालिदेन-ओ-सरपरस्तों की नुमाइंदगी पर इदारा सियासत-ओ-एम डी एफ़ की तरफ से हर इतवार को ख़ुसूसी दु बद्दू मुलाक़ात प्रोग्राम मुनाक़िद किया जाएगा, जिस में एक ही ज़ुमरे के पयामात की निशानदेही की जाएगी।

इस तरीका-ए-कार से वालिदेन को हसब मर्ज़ी लड़के-ओ-लड़की के चुंने में सहूलत हासिल रहेगी। जनाब ज़ाहिद अली ख़ां आज मुमताज़ कॉलेज में मुनाक़िदा 21 वीं दु बद्दू मुलाक़ात प्रोग्राम को मुख़ातब कर रहे थे।

उन्होंने शादी के रोज़ लड़की वालों की तरफ से खाने के रिवाज को ख़त्म करने पर ज़ोर दिया और कहा कि इस सूरत-ए-हाल के बाइस लड़की के वालिदेन को ना सिर्फ़ मुश्किलात का सामना करना पड़ रहा है, बल्कि मेहमानों के लिए भी मुसलसिल दो दिन की दावत बाइस ज़हमत बन जाती है, इस लिए शादी की सादा तक़रीब की जाये और दूसरे दिन लड़के की तरफ से तकमील सुन्नत के तौर पर वलीमा का एहतेमाम किया जा सकता है।

अगर लड़की वाले चाहें तो ये तरीका-ए-कार सब के लिए बेहतर साबित होगा। आबिद सिद्दीक़ी सदर एम डी एफ़ ने जलसे की सदारत की। बहैसीयत मेहमान ख़ुसूसी अपने ख़ुसूसी ख़िताब में ज़ाहिद अली ख़ां ने इस बात पर तशवीश का इज़हार किया कि शादीयों के लिए लड़कों के मुक़ाबले में लड़कीयों के रजिस्ट्रेशन ज़्यादा हुआ करते हैं, जबकि एसे कई ख़ानदान हैं जहां माँ बाप लड़कों की शादियां करने में ताख़ीर रवा रखते हैं, जिस के नतीजे में लड़कों की उमरें बढ़ती जा रही हैं और इसी एतेबार से उन्हें मौज़ूं रिश्ते भी नहीं मिल पाते।

उन्होंने कहा कि अगर मुसलमानों की मईशत को बेहतर बनाना हो तो फिर शादी ब्याह में इसराफ़ और ग़ैर ज़रूरी रसूमात से परहेज़ करना होगा।

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