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शादी को आसान बनाने इस्लामी तालीमात पर अमल ज़रूरी

जमात-ए-इस्लामी की तरफ से आरमोर में रिश्तों के ताल्लुक़ से बाहमी मुलाक़ात प्रोग्राम का कामयाब इनइक़ाद अमल में आया। मेहमान ख़ुसूसी की हैसियत से मुहम्मद अबदुल-अज़ीज़ सेक्रेटरी इस्लामी मुआशरा रियासत तेलंगाना ने शिरकत की और अपने सदारती

जमात-ए-इस्लामी की तरफ से आरमोर में रिश्तों के ताल्लुक़ से बाहमी मुलाक़ात प्रोग्राम का कामयाब इनइक़ाद अमल में आया। मेहमान ख़ुसूसी की हैसियत से मुहम्मद अबदुल-अज़ीज़ सेक्रेटरी इस्लामी मुआशरा रियासत तेलंगाना ने शिरकत की और अपने सदारती ख़िताब में कहा कि मुस्लमान अपने फ़र्ज़ मंसबी को भूल कर बातिल को अपना चुके हैं।

जब कि(स०) का इरशाद हैके अगर कोई बाप अपनी बेटीयों की सही तर्बीयत करके उस की शादी की ज़िम्मेदारी पूरी करता है तो इस के लिए जन्नत की ख़ुशख़बरी है। लेकिन आज शादीयों को मुश्किल बनादिया गया है, लोग घोड़े जोड़े की रस्म में मुबतला हैं।

अगर तमाम अफ़राद इस्लामी तालीमात पर अमल पैरा होते तो ये प्रोग्राम मुनाक़िद करने की नौबत ना आती। उन्होंने कहा कि आज लड़की के इंतिख़ाब के लिए इस का रंग देखा जा रहा है, अख़लाक़ और दीनदारी को नजरअंदाज़ किया जा रहा है।

इस मौके पर मुफ़्ती नूर आलम ने औलाद की तर्बीयत के उनवान पर मुख़ातिब किया, जबकि मौलाना कबीरुद्दीन मज़ाहरी ने इस्लाम में नमाज़ की एहमीयत और मुतीअ अलरहमन नोमानी ने वालिदैन की तर्बीयत के उनवान पर ख़िताब किया।

इस मौके पर जमात-ए-इस्लामी आरमोर यूनिट की तरफ से लड़के और लड़कीयों की इस्म-ए-नवीसी (बायो डाटा) के अलाहिदा अलाहिदा काउंटर लगाए गए थे।

ख़वातीन के लिए पर्दे का इंतेज़ाम किया गया था और उन के लिए बायोडाटा का अलग काउंटर लगाया गया था। इस के अलावा लड़के और लड़कीयों के रिश्तेदारों की मुलाक़ात के लिए कमरे मुख़तस किए गए थे।

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