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शादी में ग़लत रसूमात से इजतिनाब की तलक़ीन

जड़चरला, १० जनवरी (ज़रीया फैक्स) ज़ेली एहसास कमेटी मदीना मस्जिद फ़ज़ल बंडा बादे पल्ली के ज़ेर-ए-एहतिमाम जलसा इस्लाह मुआशरा निज़द मदीना मस्जिद मुहल्ला फ़ज़ल बंडा बादे पली में मुनाक़िद हुआ। जलसा की सदारत मौलाना सैयद रूफ अली ने की जबकि सय

जड़चरला, १० जनवरी (ज़रीया फैक्स) ज़ेली एहसास कमेटी मदीना मस्जिद फ़ज़ल बंडा बादे पल्ली के ज़ेर-ए-एहतिमाम जलसा इस्लाह मुआशरा निज़द मदीना मस्जिद मुहल्ला फ़ज़ल बंडा बादे पली में मुनाक़िद हुआ। जलसा की सदारत मौलाना सैयद रूफ अली ने की जबकि सय्यद फ़सीह उद्दीन सदर ज़ेली एहसास कमेटी मदीना मस्जिद ने निगरानी की और ख़ुतबा इस्तक़बालीया पेश किया। मुहम्मद ग़ौस मुही उद्दीन मोतमिद उमूमी ने तंज़ीम के अग़राज़-ओ-मक़ासिद और तंज़ीम के क़ियाम की नौईयत पर तफ़सीली रिपोर्ट पेश की।

मेहमान ख़ुसूसी मुफ़्ती हाफ़िज़ मुहम्मद क़ासिम सिद्दीक़ी तसख़ीर नक़्शबंदी नायब मुफ़्ती जामिआ निज़ामीया हैदराबाद ने अपने ख़िताब में मुस्लमानों की शादीयों को आसान बनाने नौजवानों को आख़िरत की तैय्यारी करने देन वारी का सबूत देते हुए दुनिया में नुमायां मुक़ाम पैदा करने की तलक़ीन की और घोड़े जोड़े की लानत से बचते हुए मुस्लमानों को मआशी एतबार से मज़बूत बनने की तरग़ीब दी।

मेहमान ख़ुसूसी मौलाना ज़ुबैर अहमद ख़ां रशादी सदर अमन सोसाइटी कुरनूल ने शादीयों में होने वाले ग़ैर इस्लामी रसूमात को तर्क करना, जहेज़ की लानत से बचना, शादी ब्याह में लड़की वालों पर बोझ ना बनने और एहसास कमेटी की इस एहसास मुहिम को मज़बूत बनाने और तआवुन करने की नौजवानों को दावत दी। हाफ़िज़ सैयद जाफ़र अली, मुहम्मद तस्लीम उला रज़ादी, हाफ़िज़ मुहम्मद अलीम उद्दीन ने इस जलसा को मुख़ातब करते हुए मुस्लिम मुआशरा में पाई जाने वाली ग़लत रसूमात-ओ-ग़ैर ज़रूरी इक़दामात को रोक लगाने की ज़रूरत पर ज़ोर दिया। हाफ़िज़ मुहम्मद अबदुलहमीद ख़तीब मदीना मस्जिद ने क़रा॔त कलाम पाक पेश किया।

हाफ़िज़ मुहम्मद असद उल्लाह कामिल जामिआ निज़ामीया हैदराबाद ने नाअत शरीफ़ पेश की। ख़्वाजा अज़ीम उद्दीन राना ने निज़ामत के फ़राइज़ अंजाम दिये। मुहम्मद मुइज़ उद्दीन ने जलसा की कार्रवाई चलाई। सदर जलसा मौलाना हाफ़िज़ सय्यद रूफ अली ने अपने ख़िताब में कहा कि मुस्लमान दीन-ओ-दुनिया में सुर्ख़रूई के लिए ईमान और पक्के यक़ीन के साथ हुज़ूर अकरम सिल्ली अल्लाह अलैहि वसल्लम के उस्वा हसना पर अमल पैरा हूँ नेकी करें और नेकी की दावत दें। बुराई से बचें और दूसरों को बुराई से बचने की तलक़ीन करें और ये अमल इख़लास की बुनियाद पर होना चाआई।

इस जलसा इस्लाह मुआशरा में मुख़्तलिफ़ मसाजिद के सदूर, बुज़ुर्गान, ज़िम्मा दारान समाज-ओ-दीगर तंज़ीमें में जिन में काबिल-ए-ज़िकर मुहम्मद इफ़्तिख़ार उद्दीन ऐडवोकेट, अहमद ख़ान, मुहम्मद सज्जाद, मुहम्मद अबदुर्रशीद, अबदुलक़दीर, नयाज़, मुहम्मद अबदुल नईम, मुल्क शाकिर ऐडवोकेट, सैयद मिनहाज उद्दीन, मुहम्मद मुश्ताक़, बुरहान उद्दीन सलीम, निज़ाम, मुहम्मद यूसुफ़, मसीह उद्दीन, हबीब, मुक़ीत, अबदुल मजीद, निहाल, मदीना मस्जिद एहसास कमेटी के काम ज़िम्मा दारान के इलावा मुख़्तलिफ़ मुक़ामात से आए हुए हज़ारों फ़र्र ज़िंदाँ तौहीद ने शिरकत की

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