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शामी बाशिंदे कुत्ते बिल्लियां खाने पर मजबूर

शामी शहर मज़ाया में इन्सानी बोहरान की सूरते हाल अपने इंतिहा को पहुंच गई है। अक़वामे मुत्तहिदा के फ़ूड प्रोग्राम ने मुतनब्बे किया है कि अगर फ़ौरी तौर पर इस इलाक़े के लोगों को इमदाद ना पहुंची तो मज़ीद हज़ारों जानें ज़ाए हो सकती हैं।

शामी शहर मज़ाया में इन्सानी बोहरान की सूरते हाल अपने इंतिहा को पहुंच गई है। अक़वामे मुत्तहिदा के फ़ूड प्रोग्राम ने मुतनब्बे किया है कि अगर फ़ौरी तौर पर इस इलाक़े के लोगों को इमदाद ना पहुंची तो मज़ीद हज़ारों जानें ज़ाए हो सकती हैं।

ख़बररसां इदारे डी पी ए के मुताबिक़ मज़ाया का इलाक़ा शामी फ़ौज के घेरे में है जिसने गुज़िश्ता बरस अक्तूबर से इस इलाक़े में ख़ुराक की तरसील रोक रखी है। मज़ाया के एक डॉक्टर ख़ालिद महमूद के मुताबिक़, ख़ुराक नायाब है।

हम शेर ख़ार बच्चों को दूध तक फ़राहम करने से क़ासिर हैं। आज एक 10 साला बच्चा ख़ुराक की कमी की वजह से इंतिक़ाल कर गया। लोग ज़िंदा रहने के लिए घास खा रहे हैं।

डॉक्टर ख़ालिद महमूद ने डी पी ए को मज़ीद बताया, मज़ाया के ज़्यादातर लोग ख़ुराक की शदीद कमी का इस हद तक शिकार हैं कि क़रीब 10 दिन क़ब्ल से उन्होंने कुत्तों और बिल्लियों को ज़बह कर के उनका गोश्त खाना शुरू कर दिया है।

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