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शाम की सूरत-ए-हाल

सुन्नी मुस्लिम अक्सरीयत वाले मुल्क शाम में सदर बशर अल असद (Bashar al-Assad) की हुकूमत और फ़ौज ने एहितजाजियों को नाकाम बनाते हुए ताक़त का इस्तिमाल किया है तो इस के असरात सारी दुनिया में महसूस किए जा रहे हैं।

सुन्नी मुस्लिम अक्सरीयत वाले मुल्क शाम में सदर बशर अल असद (Bashar al-Assad) की हुकूमत और फ़ौज ने एहितजाजियों को नाकाम बनाते हुए ताक़त का इस्तिमाल किया है तो इस के असरात सारी दुनिया में महसूस किए जा रहे हैं।

अरब लीग की नगर इनकार टीम भी दमिशक़ को एक ऐसे वक़्त पहूँची जब अक़वाम-ए-मुत्तहिदा ने शाम की अफ़्वाज के ज़ुलम से मरने वालों की तादाद और मुक़ामी हुकूमत के बताए गए आदाद-ओ-शुमार में फ़र्क़ पाया जाता है। अरब लीग की नगर इनकार टीम के पहुंचने के वक़्त भी दमिशक़ कार बम धमाकों से दहल गया जिस में 40 से ज़ाइद अम्वात हुईं।

शाम में ख़ानाजंगी के पढ़ते ख़तरात के पेशे नज़र और तशद्दुद को ख़तम करने गुज़श्ता माह शाम ने अरब लीग से इत्तिफ़ाक़ किया था। इस के वायदा की तकमील और अमन मंसूबा का एहतिराम करने के लिए है अरब लीग की टीम दमिशक़ पहूँची मगर अमन के लिए उस की तौसीक़ जब ही कारगर साबित होगी जब शाम की अफ़्वाज को सड़कों से हटा लिया जाये।

गिरफ़्तार करके जेलों में महरूस रखे गए शहरीयों को रिहा किया जाये और अपोज़ीशन के साथ हुकूमत बातचीत के लिए तैयार हो। सदर शाम बशार अलासद के ख़िलाफ़ एहतिजाज और इस एहतिजाज को कुचलने के लिए फ़ौज के बढ़ते मज़ालिम के दरमयान अगर एक उम्मीद की किरण बाक़ी है तो वो अरब लीग के हवाले से आलिम अरब और अक़वाम-ए-मुत्तहिदा की कोशिशें हैं।

150 रुकनी मुबस्सिरीन की टीम को दमिशक़ की सूरत-ए-हाल और वहां के मुक़ामी तक़ाज़ों क अंदाज़ा करके उगला क़दम उठाना है ताकि 9 माह से जारी बेचैनी और पद अमनी का दौर ख़तम हो सके। 46 साला बशार अलासद को अपने मुल्क के अवाम के एहतिजाज और आलमी दबाव के बाद सूरत-ए-हाल के मज़ीद अबतर होने से क़बल अमन इक़दामात करने होंगे।

शाम में एक जामि सयासी तबदीली का वक़्त आगया है तो इस तबदीली को जल्द अमल में लाई जाय ताकि शाम के अवाम के जमहूरी आरजूओं को पूरा किया जा सके मगर बैरूनी ताक़तों की मुदाख़िलत के ज़रीया किसी भी किस्म का सख़्त क़दम अमन के अमल को कामयाब नहीं बना सकेगा।

यूरोप और अमरीकी सिफ़ारतकार शाम पर असलाह की तहदीदात के इलावा दीगर कई तहदीदात नाफ़िज़ करना चाहते हैं लेकिन सदर शाम बशार अलासद से क़रीबी ताल्लुक़ात रखने वाले ममालिक रूस और चीन ने मज़ीद किसी नौईयत की तहदीदात की मुख़ालिफ़त की है। इस लिए आलमी ताक़तों को शाम की सूरत-ए-हाल को दीगर अरब ममालिक ख़ासकर लीबिया की तनाज़ुर में नहीं देखना चाहीए।

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