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शास्त्री पूरम में पीने के पानी का संगीन मसला (समस्या)

(नुमाइंदा ख़ुसूसी)। 13 जुलाई 2011-ए-को 6 करोड़ रुपये की लागत से शास्त्री पूरम में एक वसीअ (बडी)पानी की टांकी की तामीर का संग बुनियाद रखा गया था, जिस की गुंजाइश (9 ML) बताई गई थी और इस टांकी की तामीर जय एन यू आर एम के तहत होने वाली थी। वाज़ेह रहे कि हल्का असेंबली राजिंदर नगर की हदूद में शास्त्री पूरम के एक बुलंद-ओ-बाला पहाड़ी मुक़ाम पर इस टांकी का संग बुनियाद रखा गया था। इस के अतराफ़-ओ-अकनाफ़ में सौ फीसद मुस्लिम आबादी के कई मुहल्ला जात हैं।

संग बुनियाद के मौक़ा पर ये तय्क्कुन दिया गया था कि ये टांकी एक साल के अंदर अंदर मुकम्मल हो जाएगी और इस के अतराफ़ में वाक़ै मुहल्ला जात में से एक एक का नाम लेकर कहा गया था कि इन मुहल्ला जात में लोगों को पानी के हवाले से जो दुश्वारियां दरपेश हैं कि वो पानी खरीद कर पीते हैं। इस पानी की टांकी की तामीर के बाद हमेशा के लिए उन के मसाइल हल हो जाएंगे, जिस के बाद शास्त्री पूरम, डाइमंड हिलज़, किंग्स कॉलोनी, हुदा कॉलोनी, नूर कॉलोनी, राघवेनदरा कॉलोनी, एकता कॉलोनी, बी के यू राम कॉलोनी, शम्मा कॉलोनी, रोशन कॉलोनी, अकबर कॉलोनी,

मुहम्मदिया कॉलोनी, नेवाची रेड्डी नगर, बिन तरीफ कॉलोनी और रशीद कॉलोनी जहां पानी का शदीद मसला (समस्या) है। जब इस टांकी का इफ़्तिताह हुआ और साथ ही ऐलान किया गया कि जल्द ही काम का आग़ाज़ करके एक साल के अंदर मुकम्मल कर दिया जाएगा। ये सुन कर उन मुहल्ला जात में ख़ुशी की लहर दौड़ गई, लेकिन मुक़ामी अफ़राद ने अख़बार सियासत को इत्तिला दी कि एक साल मुकम्मल होगया है और अभी तक सिर्फ 10 फीसद काम हुआ है। काम का आग़ाज़ ना वक़्त पर हुआ और ना ही पाबंदी से काम हो रहा है।

इन इलाक़ों में पानी का कितना बड़ा मसला (समस्या) है, ये जानने के लिए आप ज़ेर नज़र तस्वीर को ग़ौर से देखें कि ये मासूम बच्ची जिस के सर और कमर पर पाँच, पाँच लीटर के पानी के डिब्बे रखे हुए हैं और वो बड़ी मुश्किल से डगमगाते क़दमों के साथ अपने घर की तरफ़ जा रही है। इस तस्वीर से वाज़ेह होता है कि इन इलाक़ों में पानी की कितनी शदीद क़िल्लत है।

मुक़ामी अफ़राद ने बताया कि हमारे हाँ पानी आने का एक वाहिद ज़रीया पानी का टैंकर है और जब तक मुहल्ला का लीडर ना कहे, वो भी नहीं आता। एसा माहौल बना रखा है कि गली के लीडर की भी आव भगत करनी पड़ती है, तब कहीं जाकर हमारे हलक़ से प्यास बुझती है और हमें दो बूँद पानी नसीब होता है। मालूम होना चाहीए कि ग़ौस नगर में पानी की टांकी तय्यार हुए पाँच साल होचुके, लेकिन आज तक उसे इस्तिमाल में नहीं लाया गया।

और बारकस सलाला में एक साल में एक पानी की टांकी तय्यार करने का वाअदा किया गया था। उसे भी तकरीबन तीन साल होचुके, लेकिन हनूज़(अभी भी) ना मुकम्मल है। अब देखना ये होगा कि शास्त्री पूरम की पानी की टांकी की तामीर अंजाम तक पहुंचती है यह यहां के अवाम को अंजाम तक पहुंचाती है।

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