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शाही इमाम ने बेटे को जानशीन चुनने की रस्म में दी नवाज़ शरीफ को दावत लेकिन नहीं बुलाया मोदी को

दिल्ली की जामा मस्जिद के शाही इमाम सैयद अहमद बुखारी ने अपने 19 साल के बेटे सैयद शाबान बुखारी को अपना जानशीन बनने का एलान किया है| 22 नवंबर को दस्तारबंदी की रस्म के साथ उन्हें नायब इमाम ऐलान किया जाएगा|

दिल्ली की जामा मस्जिद के शाही इमाम सैयद अहमद बुखारी ने अपने 19 साल के बेटे सैयद शाबान बुखारी को अपना जानशीन बनने का एलान किया है| 22 नवंबर को दस्तारबंदी की रस्म के साथ उन्हें नायब इमाम ऐलान किया जाएगा|

दस्तारबंदी की रस्म में शामिल होने वाले मेहमानों की फहरिस्त में पाकिस्तान के वज़ीर ए आज़म नवाज शरीफ का तो नाम है, लेकिन अपने मुल्क के वज़ीर ए आज़म नरेंद्र मोदी मोदी का नाम गायब है|

प्रोग्राम के मुताबिक 22 नवंबर को दस्तारबंदी होगी| उस रात और 25 नवंबर को खास मेहमानों के लिए डिनर है| 29 नवंबर को कई मुल्कों के सिफारती और दिग्गज सियासी हस्तियां शामिल होंगीं, लेकिन खास बात ये है कि किसी भी प्रोग्राम में मोदी को दावत नहीं हैं|

हालांकि, उन्होंने मोदी कैबिनेट के ज़्यादातर वुजराओं को दावत भेजे है जिनमें वज़ीर ए दाखिला राजनाथ सिंह, हेल्थ मिनिस्टर हर्षवर्धन के नाम शामिल हैं|

बुखारी का कहना है कि हिंदुस्तान का मुसलमान खुद को अभी भी मोदी से रिश्ता नहीं जोड़ जा रहा है| हिंदुस्तान में ज़्यादतर हिंदुस्तनैइ हुकूक की तंज़ीम कारकुन 2002 के गुजरात दंगों के दौरान मोदी की काम करने की सलाहियत पर सवाल उठाते हैं और उन्हें दंगे जानबूझकर नहीं रोकने का मुजरिम मानते हैं. हालांकि, किसी भी अदालात ने मोदी को अब तक मुजरिम नहीं माना है|

दस्तारबंदी की तकरीब के लिए कांग्रेस सदर सोनिया गांधी, नायब सदर राहुल गांधी और समाजवादी पार्टी के लीडर मुलायम सिंह यादव और यूपी के वज़ीर ए आला अखिलेश यादव को दावत भेजी गई है|

आपको बता दें कि मुगल शहंशाह शाहजहां ने दिल्ली की आलीशान जामा मस्जिद तामीर कराई थी| ये मस्जिद 1656 में बनकर तैयार हुई थी| मस्जिद में पहली नमाज 24 जुलाई 1656, दिन पीर ईद के मौके पर पढ़ी गई | नमाज के बाद इमाम गफूर शाह बुखारी को बादशाह की तरफ से भेजी गई खिलअत (शाही लिबास और दोशाला) दी गई और शाही इमाम का खिताब दिया गया. तभी से शाही इमाम की ये रवायत बरकरार है|

कौन होंगे जानशीन ?

सैयद शाबान बुखारी सोशल वेलफेयर में ग्रेजुएट कोर्स कर रहे हैं| 2002 से उनके वालिद अहमद बुखारी इमाम हैं| अहमद बुखारी अपनी देखरेख में शाबान बुखारी को नायब इमाम के तौर पर ट्रेंड कर रहे हैं|

खास बात ये है कि गुजश्ता 400 साल से बुखारी का खानदान ही नस्ल दर नस्ल हिंदुस्तान की इस तारीखी मस्जिद का इमाम बनता आया है|

मुल्क में दिल्ली की जामा मस्जिद के इमाम का ओहदा खासा ताकतवर माना जाता है| इमाम आम इंतेखाबात के दौरान किसी न किसी सियासी पार्टी की ताईद में एलान भी करता आया है|

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