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शिंदे को मालूम था तो क्यों नहीं रोक पाए धमाके? मरने वालों की तादाद में इज़ाफा

नई दिल्ली, 22 फरवरी: हैदराबाद हुए धमाकों में मरने वालों की तादाद 17 हो गई है, जबकि 119 जख़्मी हैं। जख्मियों में 6 की हालत अब भी नाज़ुक बताई जा रही है।

नई दिल्ली, 22 फरवरी: हैदराबाद हुए धमाकों में मरने वालों की तादाद 17 हो गई है, जबकि 119 जख़्मी हैं। जख्मियों में 6 की हालत अब भी नाज़ुक बताई जा रही है।

वज़ीर ए दाखिला सुशील कुमार शिंदे ने हैदराबाद पहुंचकर ज़ाय हादिसा का दौरा किया। शिंदे आज बम धमाकों में जख्मी हुए लोगों से भी मुलाकात करेंगे।

वज़ीर ए दाखिला ने आज हैदराबाद धमाकों पर संसद के दोनों सदनों में बयान देने का ऐलान भी किया है। इम्कान है कि शिंदे दो बजे संसद में बयान दे सकते हैं। वहीं, वज़ीर ए दाखिला के इस बयान पर तनाज़ा शुरु हो गया है कि उनको धमाकों की खुफिया इत्तेला थी।

सवाल उठ रहे हैं कि वज़ारत ए दाखिला को मुल्क में दहशतगर्द वारदात होने की इत्तेला थी तो सेक्युरिटी को चाक-चौबंद क्यों नहीं किया गया? सेक्युरिटी एजेंस‌ियों को अलर्ट पर क्यों नहीं रखा गया? क्या यह बम धमाके सेक्युरिटी निज़ाम की चूक का नतीजा है? क्या एक बार फिर सारी सेक्युरिटी लाचार साबित हुई?

गौरतलब है कि शिंदे ने जुमेरात को कहा था कि हैदराबाद दहशगर्दों के निशाने पर है इस बात का पता दो दिन पहले से ही था और हमने इस बारे में रियासती हुकूमत को इत्तेला भी किया गया था।

इस मामले में आंध्र प्रदेश के वज़ीर ए आला किरण कुमार रेड्डी ने कहा है कि उन्हें रूटीन अलर्ट ही भेजा गया था किसी गंभीर हमले की सूचना नहीं दी गई थी।

बताया जा रहा है कि खुफिया एजेंसियों को हैदराबाद में दहशतगर्दी वारदात का खदशा पहले से था। एजेंसियां हैदराबाद पर कई महीनों से नजर गड़ाए बैठी थी।

पिछले कुछ महीनों से पुराने हैदाराबाद के तारीखी चारमीनार के पास भाग्यलक्ष्मी मंदिर के वजह से कई बार भड़के फिर्कावाराना तनाव के वजह से हालात काफी हस्सास थे।

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