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शिकस्त के लिए चीफ़ मिनिस्टर-ओ-सदर पी सी सी ज़िम्मेदार, शंकर राव , फ़ौरी इस्तीफ़ा का मुतालिबा

कांग्रेस के रुकन असैंबली-ओ-साबिक़ रियास्ती वज़ीर डाक्टर शंकर राव ने पार्टी की शिकस्त का ज़िम्मेदार चीफ़ मिनिस्टर और सदर प्रदेश कांग्रेस को क़रार देते हुए दोनों को अख़लाक़ी ज़िम्मेदारी क़बूल करते हुए मुस्ताफ़ी होने का मश्वरा

कांग्रेस के रुकन असैंबली-ओ-साबिक़ रियास्ती वज़ीर डाक्टर शंकर राव ने पार्टी की शिकस्त का ज़िम्मेदार चीफ़ मिनिस्टर और सदर प्रदेश कांग्रेस को क़रार देते हुए दोनों को अख़लाक़ी ज़िम्मेदारी क़बूल करते हुए मुस्ताफ़ी होने का मश्वरा दिया, तजुर्बा ना होने के सबब कांग्रेस को मस्नूई आलात तनफ़्फ़ुस पर पहुंचाने का इल्ज़ाम आइद किया और रियासत पर सदर राज(राष्ट्रपती शासन) के बादल मंडलाने का इद्आ किया।

डाक्टर शंकर राव ने पार्टी सदर मिसिज़ सोनीया गांधी को मकतूब रवाना करते हुए रियासत की ताज़ा सूरत-ए-हाल से वाक़िफ़ किराया। आज अहाता असैंबली में मीडीया से बातचीत करते हुए उन्हों ने कहा कि रियासत में पार्टी की शिकस्त नहीं हुई है, बल्कि चीफ़ मिनिस्टर को शिकस्त हुई है। श्रम की बात है कि चीफ़ मिनिस्टर एन किरण कुमार रेड्डी अपने आबाई ज़िला चित्तूर में असैंबली हल्का तिरूपति से पार्टी उम्मीदवार को कामयाब बनाने में नाकाम रहे।

सोनीया गांधी बदउनवानीयों (भ्रष्टाचार) के ख़िलाफ़ हैं, जब कि चीफ़ मिनिस्टर रियासत में बदउनवान (भ्रष्ट) वुज़रा की मुदाफ़अत (बचाव) कर रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट ने 6 वुज़रा को नोटिस दी है, जिस से हुकूमत और पार्टी की नेकनामी मुतास्सिर हुई है और अवाम ने ज़िमनी इंतिख़ाबात (उप चुनाव) में कांग्रेस उम्मीदवारों पर अपना ग़ुस्सा उतारा है।

उन्हों ने बदउनवानीयों (भ्रष्टाचार) के ख़िलाफ़ आवाज़ उठाई थी, जिस के सज़ा के तौर पर उन्हें वज़ारत से बरतरफ़ कर दिया गया। उन्हों ने कहा कि चीफ़ मिनिस्टर की कारकर्दगी काबिल-ए-सताइश नहीं है, उन की ना तजुर्बा कारी से कांग्रेस को नुक़्सान हो रहा है। कांग्रेस बिस्तर-ए- मर्ग तक पहुंच चुकी है, अगर हाई कमान रियासत पर फ़ौरी तवज्जा नहीं देती तो कांग्रेस का बहुत बड़ा नुक़्सान होगा।

रियासत में सदर राज नाफ़िज़ होने और चीफ़ मिनिस्टर की तबदीली के इमकानात पाए जाते हैं। उन्हों ने कहा कि रियासत में दलित, अक़लियत, दानिश्वर और तालीम-ए-याफ़ता अफ़राद कांग्रेस से दूर हो चुके हैं, चार पसमांदा तबक़ात के लिए मुख़तस नशिस्तों पर कांग्रेस की नाकामी जिस का सबूत है। वो बद उनवान वुज़रा के ख़िलाफ़ अपनी मुहिम जारी रखेंगे और ज़रूरत पड़ने पर सुप्रीम कोर्ट में उन के ख़िलाफ़ दरख़ास्त दाख़िल करते हुए वो ख़ुद फ़रीक़ बनेंगे।

चीफ़ मिनिस्टर को फ़ौरी तबदील नहीं किया गया और बद उनवान (भ्रष्ट) वुज़रा को वज़ारत से नहीं हटाया गया तो कांग्रेस के लिए मज़ीद मुश्किलें पैदा होंगी।

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