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‘शौहर से बदला लेने के लिए बेटी को बनाया हथियार’

बेटी से रेप के मामले में मुल्ज़िम बाप को हाई कोर्ट ने बरी कर दिया। हाई कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि यह एक बदकिस्मत वाला वाकिया है जिसमें एक खातून ने शौहर से बदला लेने के लिए अपनी बेटी का इस्तेमाल हथियार के तौर पर किया। हाई कोर्ट ने

बेटी से रेप के मामले में मुल्ज़िम बाप को हाई कोर्ट ने बरी कर दिया। हाई कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि यह एक बदकिस्मत वाला वाकिया है जिसमें एक खातून ने शौहर से बदला लेने के लिए अपनी बेटी का इस्तेमाल हथियार के तौर पर किया। हाई कोर्ट ने कहा कि रेप जैसे वाकियात वहशियाना हैं और इस बात से कोई इनकार नहीं कर सकता। लेकिन इस मामले के दूसरे पहलू को भी देखना होगा, जिसमें कई बार झूठे मामले भी होते हैं। अदालत ने कहा कि रेप मामले में गलत तरीके से फंसाए जाने की वजह से उस शख्स का ट्रॉमा गौर करने वाला है और वह भी तब, जब इल्ज़ाम लगाने वाली अपनी बेटी हो। अदालत ने कहा कि इस तरह के केसों की वजह से असल और सच्चे मामले भी हल्के पड़ने लगते हैं।

हाई कोर्ट के जस्टिस कैलाश गंभीर ने अपने फैसले में कहा कि समाज में यह ख्याल है कि ख्वातीन रेप का झूठा इल्जाम नहीं लगातीं और खासकर अपने घर वालों के खिलाफ झूठा रेप केस दर्ज नहीं कराया जाता। लेकिन यह मामला गैर मामूली है, जिसमें खातून ने अपने शौहर से बदला लेने के लिए बेटी को हथियार की तरह इस्तेमाल किया। मामले में मेडिकल और दूसरे तमाम सुबूतों से यह साबित होता है कि लड़की के साथ रेप नहीं हुआ और लड़की ने अपनी मां के कहने पर वालिद के खिलाफ बयान दिया।

खातून ने अपने साबिक शौहर से बदला लेना चाहती थी और इसी वजह से उसने अपनी बेटी का इस्तेमाल किया।

यह अफ्सोसनाक बात है कि इस पूरे वाकिया ने एक शख्स को रेप जैसे केस में मुल्ज़िम बना दिया। हाई कोर्ट ने निचली अदालत के फैसले को खारिज कर दिया और हिदायत दी कि जब भी निचली अदालत ऐसे मामले को देखे, तो वह बारीकी से देखे। साथ ही, यह भी हिदायत दी कि मुल्ज़िम को जेल से रिहा किया जाए।

पेश मामले के मुताबिक, मगरिबी विहार इलाके में पुलिस को खबर मिली कि 11 साल की लड़की के साथ उसके वालिद ने रेप किया है। लड़की की शिकायत पर पुलिस ने रेप का केस दर्ज कर लिया। इल्ज़ाम लगाया गया कि नवंबर व दिसंबर, 2006 में रेप किया गया है। इस बारे में 30 मई, 2007 को पुलिस को इत्तेला दी गई। इस मामले में पुलिस ने 17 गवाह पेश किए। जबकि मुल्ज़िम ने दलील दी कि वह बेगुनाह है और उसे फंसाया गया है। उसने कहा कि उसकी बीवी से उसके ताल्लुकात ठीक नहीं थे, इसी वजह से उसे फंसाया गया है। निचली अदालत ने मुल्ज़िम को उम्रकैद की सजा सुनाई, लेकिन हाई कोर्ट ने निचली अदालत के फैसले को खारिज करते हुए मुल्ज़िम को बरी कर दिया।

————बशुक्रिया: नव भारत टाइम्स

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