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श्रमजीवी ब्लास्ट मे दूसरे मुख्य अभियुक्त ओबैदुर्रहमान को फाँसी की सजा का एलान

लखनऊ। तक़रीबन एक दशक पूर्व श्रमजीवी विस्फोट कांड में मारे गए 12 लोगों के मामले में मुख्य अभियुक्तों में एक बांग्‍लादेश के ओबैदुर्रहमान उर्फ बाबू को एडीशनल सेशन जज प्रथम बुधिराम यादव की अदालत ने फांसी की सजा सुनाई। इसके अलावा 10 लाख 30 हजार रुपए का जुर्माना भी लगाया गया।
इस मामले के एक अन्य मुख्य आरोपी मोहम्मद आलमगीर उर्फ रोनी को पहले ही फांसी की सजा सुनाई जा चुकी है। ओबौदुर्रहमान ने सजा सुनाए जाने के बाद मीडिया से कहा कि वह भी आलमगीर की तरह निचली अदालत के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील करेगा। वह पहले मुर्शिदाबाद के जेल में बंद था। इस कारण कोर्ट की सुनवाई में आ रही दुश्वारियों के चलते उसे 9 मई 2006 को मुर्शिदाबाद के बहरामपुर जेल से जौनपुर शिफ्ट कर दिया गया था।वह बिना वीजा, पासपोर्ट के बांग्लादेश से भारत आने और विस्फोटक बनाने का आरोपी है।
उसे 23 जनवरी 2006 को पश्‍चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद से गिरफ्तार किया गया था। इस मामले में 46 लोगों की गवाही ली गई है। वह बम बनाने के बाद बांग्लादेश भाग गया था, पर विस्फोट की एक घटना के बाद दोबारा भारत आ गया।वाराणसी के आतंकी अब्दुल्ला से पूछताछ में इसका नाम सामने आया था। कोलकाता जेल में बंद

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देशद्रोह के आरोपी अब्दुल्ला, जमदेशपुर के तारीक अख्तर और नूर मोहम्मद ने पूछताछ में ओबैदुर्रहमान के बारे में जानकारी दी थी। इसके लश्कर-ए-तैयबा और आईएसआई से संबंध बताए जाते हैं। श्रमजीवी कांड में कुल सात लोग आरोपी बाए गए थे। जिनमें चार की गिरफ़्तारी हो चुकी है। मुख्य आरोपी मोहम्मद आलमगीर को 30 जुलाई को फँसी की सजा सुनाई जा चुकी है। मामले के दो अन्य आरोपी हिलाल और नफीकुल विश्वास हैं इस वक्त आंध्र प्रदेश की जेल में बंद हैं।

लखनऊ से एम ए हाशमी

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