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श्रीनगर में हुर्रियत के जुलूस को नाकाम बनाने पाबंदियां

श्रीनगर । ओहदेदारों ने आज शहर श्रीनगर के पुराने इलाके में एतिदाल पसंद हुर्रियत कान्फ्रंस के ईदगाह के मुक़ाम पर जुलूस और जल्सा-ए-आम मुनाक़िद करने के मंसूबा को नाकाम बनाने के लिए सख़्त पाबंदियां लगाइ।

श्रीनगर । ओहदेदारों ने आज शहर श्रीनगर के पुराने इलाके में एतिदाल पसंद हुर्रियत कान्फ्रंस के ईदगाह के मुक़ाम पर जुलूस और जल्सा-ए-आम मुनाक़िद करने के मंसूबा को नाकाम बनाने के लिए सख़्त पाबंदियां लगाइ।

एतिदाल पसंद हुर्रियत कान्फ़्रैंस इस के दो हलाक हुए क़ाइदीन की बरसी(श्रध्धाजली) के मौके पर जलूस निकालना और जल्सा-ए-आम मुनाक़िद करना चाहती थीं। 5 पुलिस स्टेशनों की हुदूद में श्रीनगर के आजुबाजु के इलाकों में पाबंदियां लागु करदी गईं। पुलिस और सी आर पी एफ़ के कर्मचारी जो इस इलाके में पहले ही से तय थे, उस की तादाद में बढावा कर दिया गया ताकि जुलूस निकालने और जलसा मुनाक़िद करने की किसी भी कोशिश को नाकाम बनाया जा सके।

पुराने शहर के इलावा पुलिस और निम फ़ौजी फोर्से की ज़्यादा तादाद शहर के बाज़ हस्सास इलाक़ों में तैनात करदी गई। एतिदाल पसंद हुर्रियत कान्फ्रंस जिस के सदर मीर वाइज़ उम‌र फ़ारूक़ को कल से उन की क़ियामगाह पर नज़रबंद कर दीया गया है। उन्हों ने वादी कश्मीर में बंद मनाने और ईदगाह तक जुलूस की शक्ल में जाने का एलान किया था, जहां उन के वालिद मौलाना फ़ारूक़ और हुर्रियत कान्फ़्रैंस के एतिदाल पसंद क़ाइद अबदुलग़नी लोन की कबरें हैं।

मौलाना फ़ारूक़ अवामी एक्शण कमेटी के सदर थे, जिन्हें 1990 में नामालूम बंदूक़ बर्दारों ने जो पुलिस के दावे के मुताबिक आतंकवादी ग्रुप हिज़्ब उल-मुजाहिदीन के सदस्य‌ थे, गोली मार कर हलाक कर दिया था। अबदुलग़नी लोन को एक जुलूस के दौरान गोली मार दी गई थी जो फ़ारूक़ मरहूम को ख़िराज-ए-अक़ीदत पेश करने 2002-ए-में आज ही के दिन जा रहे थे।

हरीफ़ कान्फ़्रैंस की तरफ‌ से हड़ताल के एलान पर मिला-जुला रद्द-ए-अमल देखा गया। कारोबारी इदारे और दुकानें शहर के तिजारती मर्कज़ लाल चौक और करीबी इलाक़ों में बंद रहीं। सड़कों पर ट्रैफ़िक बहुत कम थी। लेकिन आजुबाजु के इलाक़ों और सिवील लाइंस में लोग अपने मामूलात-ए-ज़िंदगी में मसरूफ़ नज़र आए।

मक़्तूल क़ाइदीन को ख़िराज-ए-अक़ीदत पेश करने के लिए ईदगाह तक जुलूस इस से पहले 2011-ए-में भी ओहदेदारों ने नाकाम बना दिया था। आज पाबंदि शहर के इन इलाक़ों में लगाइ गई हैं जहां पुलिस को एतिदाल पसंद हुर्रियत कान्फ़्रैंस में दाख़िली झड़पों का अंदेशा था और अंदेशा था कि ये झड़पें शिद्दत इख़तियार करने पर सड़क पर आ जाएंगी।

अगर ये ताज़ियती जुलूस निकाला गया। आज सुबह ज़िलई ओहदेदारों की एक टीम ज़िला मजिस्ट्रेट की क़ियादत में मीर वाइज़ उम‌र फ़ारूक़ से मुलाक़ात के लिए गई ताकि तय किये हुए जुलूस और ईदगाह में जल्सा-ए-आम के इनइक़ाद में सहूलत दी जासके । लेकिन‌ उम‌र फ़ारूक़ ने टीम से मुलाक़ात करने से इनकार कर दिया। उन्हों ने कहा कि सूरत-ए-हाल ओहदेदारों के सपुर्द करदी गई है। चुनांचे ओहदेदारों को तहदीदात आइद करने के सिवाए कोई और मुतबादिल बाक़ी नहीं रहा था।

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