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संघ ने करवाई मिन्हाज की हत्या! : रिपोर्ट

सियासत हिन्दी। रांची/जामताड़ा : 22 वर्षीया मुस्लिम युवक मिन्हाज अंसारी की पुलिस पिटाई की मौत प्रकरण की जांच टीम में गए लोगों ने ए.आई.पी.एफ के अनिल अंशुमन व धीरज, ए.पी.सी.आर के ज़ियाउलाह, अंजुमन इस्लामिया रांची के तनवीर, युवा उलगुलान के आकाश व नदीम खान ने महेंद्र सिंह भवन, काली मंदिर रोड रांची में आयोजित प्रेस वार्ता में मिन्हाज़ अंसारी की मौत प्रकरण पर जांच रिपोर्ट जारी की. रिपोर्ट जारी करते हुए कहा गया रघुवर शासन में एक ओर लोकतांत्रिक आवाजों को कुचलने के लिए पुलिसिया दमन का आतंक राज्य चलाया जा रहा है तो साथ ही साथ संघ परिवार के सदस्यों द्वारा लगातार गो रक्षा के नाम पर मुसलमानों की ह्त्या की जा रही है. जिसमे पुलिस प्रशासन प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से शामिल है.

जांच दल के सदस्यों ने कहा कि मिन्हाज़ की मौत पुलिस हिरासत में पिटाई से हुई है. जिसमे नारायणपुर के थाना प्रभारी हरीश पाठक व विश्व हिन्दू परिषद के जामताड़ा जिला प्रमुख सोनू सिंह का हाथ है. वक्ताओं ने मिन्हाज़ अंसारी के मौत के लिए जिम्मेदार हरीश पाठक व सोनू सिंह की गिरफ्तारी व उनपर ह्त्या का मुकदमा चलाने, घटना की न्यायिक जांच व मृतक के परिवार को 25 लाख का मुआवजा देने की मांग की साथ ही बालूमाथ, चान्हों, पेलावल समेत अन्य जगहों पर धार्मिक उन्मादियों द्वारा पुलिस प्रशासन सहयोग से अल्पसंख्यकों पर हो रहे हमलों के दोषियों को अविलम्ब कार्रवाई करने तथा विशेष न्यायिक जांच कराये जाने की मांग की. वक्ताओं ने यह भी कहा उक्त सवालों पर जल्द ही राज्यव्यापी गोलबंदी की जाएगी.

मिन्हाज़ अंसारी के मौत प्रकरण की जांच रिपोर्ट…

राज्य के जामताडा जिला स्थित नारायणपुर प्रखंड दीघारी गाँव निवासी 22 वर्षीया मिन्हाज़ अंसारी की पुलिस पिटाई से हिरासत में हुई मौत प्रकरण की जांच के लिए ए.आई.पी.एफ समेत अन्य संगठनो के सामजिक कार्यकर्ताओं ने 17 अक्टूबर को मृतक मिन्हाज़ अंसारी के घर जा कर उनके परिजनों एवं अन्य ग्रामीणों से बातचीत कर जानकारी ली.

जांच दल में शामिल सदस्य : अनिल अंशुमन(ए.आई.पी.एफ), अफज़ल अनीस( यूनाईटेड मिल्ली फोरम), ज़ियाउल्लाह (ए.पी.सी.आर), धीरज( भोजन का अधिकार अभियान), तनवीर ( अंजुमन इस्लामिया रांची), आकाश ( युवा उलगुलान मंच), सहदेव यादव भाकपा( माले)

3 अक्टूबर शाम नारायणपुर थाना प्रभारी पुलिस मिन्हाज़ अंसारी व फहीम और शाहबान को मिन्हाज़ के दूकान से पीटते हुए ले गयी. मिन्हाज़ के खिलाफ व्हाट्स ग्रुप पर विवादित तस्वीर डालने की शिकायत थी. 9 अक्टूबर को मिन्हाज़ अंसारी की मौतक रिम्स रांची में हो गयी.

मिन्हाज़ की मौत पुलिस हिरासत में हुई है जिसमें नारायणपुर थाना के सब इंस्पेक्टर हरीश पाठक और विश्व हिन्दू परिषद् के जामताड़ा जिला मंत्री सोनू सिंह का हाथ है. मिन्हाज़ के परिजनों द्वारा बताया गया कि जब उन्होंने मिन्हाज़ की लाश देखी तो उसके गर्दन, हाथ और पैर की की हड्डी टूटी हुई थी. पोस्टमार्टम रिपोर्ट में आंतरिक रक्त स्त्राव की बात की गयी है. 20 वर्षीय मिन्हाज़ को यह पता चल गया था कि पुलिस उसे मार देगी जब 3 अक्टूबर की रात को गिरफ्तारी के साथ ही की जा रही बर्बर पिटाई के चंद घंटो बाद ही साथ में गिरफ्तार किये गए शाहबान और फहीम को उसने बताया कि वह ज़िंदा नहीं बचेगा. शाहबान ने जांच दल को बताया कि शुरुआत में तो मिन्हाज़,फहीम और शाहबान को साथ में पीटा गया. लेकिन बाद में मिन्हाज़ को एक अलग कमरे में ले जाकर मारा गया. उन्हें उस कमरे से मिन्हाज़ के चिल्लाने की आवाज सुनाई दे रही थी. अलग करने के बाद फहीम और शाहबान को मिन्हाज़ से दो बार, एक बार 3 की अक्टूबर की रात को और दुसरी बार 4 अक्टूबर की सुबह को मिलवाया गया. दोनों ही बार वह बोलने की हालत में नहीं था और उसने इशारा किया कि वह नहीं बचेगा.अपने जान के खतरे की बात मिन्हाज़ ने अपनी बहन को फोन पर भी बतायी थी. 3 अक्टूबर की रात को मिन्हाज़ को गिरफ्तार करने के बाद नारायणपुर के थाना प्रभारी हरीश पाठक जब पुलिस फोर्स के साथ मिन्हाज़ के घर में रात को 11:30 बजे घुसकर मिन्हाज़ का लैपटौप और सिम ले जाने आया था उस वक़्त थाने से मिन्हाज़ की बात उसकी बहन से कराई गयी थी. तब उसने अपनी बहन से कहा कि “लैपटौप, सीम जो मांग रहे हैं दे दो, घर मांग रहे हैं तो घर भी दे दो मेरी जान खतरे में है.”

हलाकि आधिकारिक तौर पर मिन्हाज़ को 9 अक्टूबर को मृत घोषित किया गया पर मिन्हाज़ के माता पिता और रिश्तेदारों ने 4 अक्टूबर को ही मान लिया था कि मिन्हाज़ मर चुका है. मिन्हाज़ के पिता उमर मियाँ ने बताया कि पुलिस द्वारा मिन्हाज़ को उठा ले जाने के बाद उन्होंने मिन्हाज़ को एक भी बार ज़िंदा नहीं देखा उसे लाश की तरह ही पाया. एक बार उसे जामताड़ा में एस पी के सामने प्रस्तुत किया गया वहाँ पर वह बेहोश था. 4 अक्टूबर को मिन्हाज़ को पी.एम.सी.एच, धनबाद भेज दिया गया. वहां पर भी उसकी माँ ने उसे हिलाया डुलाया पर शरीर में कोइ हरकत नहीं हुई न ही मिन्हाज़ से कोई बात चीत हुई. 6 अक्टूबर को उसे रांची के रिम्स अस्पताल में भेज दिया गया. जहां मिन्हाज़ के माता पिता भी थें पर वहाँ भी शरीर में कोई हरकत नहीं हुई और न ही मिन्हाज़ ने एक शब्द बोला. 9 अक्टूबर को मिन्हाज़ को सरकारी तौर पर मृत घोषित कर दिया गया.

3 अक्टूबर की रात को नारायणपुर थाने के सब इंस्पेक्टर हरीश पाठक के नेतृत्व में मिन्हाज़ की दूकान के आस पास खौफ और आतंक फैलाया गया. और लोगों को गोली से मार देने की धमकी दी गयी.शहाबुद्दीन जिनकी चप्पल की दूकान मिन्हाज़ की दूकान के पास है ने बताया कि 3 अक्टूबर की रात नौ बजे जब वे सोने जा रहे थें तो उन्हें “बचाओ बचाओ” की आवाज सुनाई दी. उन्होंने घर की छत से देखा कि मिन्हाज़,फहीम और शाहबान को 8 से 10 लोग दौड़ा रहे हैं. उन्होंने सोचा कि वे गुंडे हैं. क्योंकि पुलिस वाले सादे कपडे में थें.मिन्हाज़ के दुकान के बगल में ही खड़े एक व्यक्ति को धमकी भी दी गयी कि अन्दर जाओ नहीं तो गोली मार देंगे
शाहबान ने बताया कि वह मिन्हाज़ की दूकान के पास खड़ा था लगभग 8 से 10 पुलिस वाले सादे कपडे में आये. शाहबान ने सोचा कि वे गुंडे हैं और वे भागने लगे. पुलिस द्वारा उन्हें दौड़ा दौड़ा कर मारा गया.

मिन्हाज़ के परिवार को आधी रात में किया गया आतंकित
मिन्हाज़ के चाचा कादिर मियाँ ने बताया कि मिन्हाज़ को उठा ले जाने के लगभग दो घंटे बाद रात 11:30 बजे सब इंस्पेक्टर हरीश पाठक के नेतृत्व में 18 से 20 पुलिस वाले मिन्हाज़ के घर आयें. घर में सिर्फ महिलायें और बच्चे थें. उन्होंने डर से दरवाजा नहीं खोला. पुलिस वालों ने बड़े बड़े पत्थरों से दरवाजा तोड़ने का प्रयास किया. दरवाजा खोलने के बाद हरीश पाठक ने मिन्हाज़ की बहन को रंडी कह कर गाली दी और कहा कि मिन्हाज़ को ज़िंदा नहीं छोड़ेंगे. उसके बाद मिन्हाज़ का लैपटौप, सिम कार्ड और 3000 रुपये ले गए। हरीश पाठक ने मिन्हाज़ के चाचा और अन्य परिजनों को भी धमकी दिया कि अगर मिन्हाज़ के पक्ष में बोले तो जेल के अन्दर डाल देंगे.सब इंस्पेक्टर ने यह भी कहा कि वह सिर्फ मर्डर करता है. न सिर्फ 3 अक्टूबर की रात को बल्कि 4 अक्टूबर की सुबह भी जब मिन्हाज़ के परिजन मिन्हाज़ से मिलने नारायणपुर थीं गए तो उन्हें मिन्हाज़ से नहीं मिलने दिया गया और परिजनों के साथ बदतमीजी और मारपीट की गयी.

मिन्हाज़ के परिजनों के पर ही किया गया झूठा मुकदमा
मिन्हाज़ के परिजनों को परेशान, हताश और चुप कराने के लिए उनके पिता और अन्य चार लोगों पर हरीश पाठक के द्वारा ह्त्या के प्रयास का झूठा मुकदमा दायर कर दिया गया है. हरीश पाठक ने अपने लिखित बयान में कहा है कि 4 अक्टूबर की रात को पी.एम.सी.एच धनबाद में उन पर चाक़ू से कातिलाना हमला किया गया. यह सरासर झूठ है. मिन्हाज़ के पिता ने बताया कि 4 अक्टूबर को यह सूचना मिलने के बाद कि मिन्हाज़ को पी.एम.सी.एच धनबाद भेज दिया गया है वे और मिन्हाज़ की माँ अस्पताल पहुँचे. बेटे को लाश की तरह देखकर मिन्हाज़ की माँ उत्तेजित हो गयी और रोते हुए भावावेश में अपने हाथ को हरीश पाठक के शरीर पर रखकर कहा कि मेरे बेटे को मार दिया मुझे भी मार दो. जिस वजह से चूड़ियां फुट जाने से हरीश पाठक को हलकी सी खरोंच आ गयी.

विश्व हिन्दू परिषद् (संघ परिवार) के तत्वों ने रची मौत की पृष्ठ भूमि …..

मिन्हाज़ की मौत में संघ परिवार और गौ रक्षा दल की सीधी भूमिका है.सोनू सिंह जिसने मिन्हाज़ के खिलाफ शिकायत की थी मिन्हाज़ को पीट पीट कर मारने में उसका भी हाथ है. मिन्हाज़ के चाचा ने बताया कि जब वे थाना गए तो वहाँ सोनू सिंह भी था और वह भी मिन्हाज़ को पीट रहा था और हरीश पाठक को मिन्हाज़ को मारने का निर्देश दे रहा था.पाबियाँ गाँव का रहने वाला सोनू सिंह विश्व हिन्दू परिषद् के जामताड़ा जिले का जिला मंत्री है. गाँव के लोगो द्वारा बतलाया गया वह चमड़ा ले जाने वाली गाड़ियां पकडवाकर पैसा वसूलने का काम करता है और बकरीद के पहले जामताड़ा के करमाटांड में हुए दंगे में भी उसका हाथ है.

हरीश पाठक एवं सोनू सिंह के खिलाफ ह्त्या की प्राथमिकी…..

मिन्हाज़ के परिजनों द्वारा हरीश पाठक एवं सोनू सिंह के खिलाफ ह्त्या की प्राथमिकी दर्ज की गयी है.

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