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संघ-भाजपा में मंथन, अगला राष्ट्रपति कौन? सुषमा या सुमित्रा

नई दिल्ली: 22 तारीख को इंदौर में खत्म हुए प्रशिक्षण वर्ग के बाद ये बातें हवा में तैरने लगी हैं कि शंकरदयाल शर्मा के बाद मध्यप्रदेश से एक और शख्स राष्ट्रपति बन सकता है. इस रेस में दो महिलाएं हैं और लोकसभा में मध्यप्रदेश का ही प्रतिनिधित्व करती हैं. हालांकि, थोड़ी-बहुत चर्चा संघ के दिल्ली स्थित कार्यालय में भी शुरू हो चुकी है.

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ईनाडु इंडिया के ख़बरों के अनुसार, यदि औचक कोई परिवर्तन नहीं होता है तो आरंभिक दौर में संघ, भाजपा में विदेश मंत्री सुषमा स्वराज और लोकसभा की स्पीकर सुमित्रा महाजन के नाम पर चर्चा चलने लगी है. अभी इस संबंध में कोई भी दावा करना जल्दबाजी होगी. राजधानी नई दिल्ली में झंडेवालान स्थित आरएसएस कार्यालय में भी दबी जुबान में राष्ट्रपति पद के नामों पर चर्चा हो रही है. चूंकि, अभी यूपी, पंजाब, उत्तराखंड में विधानसभा चुनाव होने हैं, इसलिए खुलकर चर्चा नहीं हो पा रही है.
नरेंद्र मोदी को लोकसभा चुनाव के दौरान पीएम पद का प्रत्याशी घोषित किये जाने से नाराज़ आडवानी को यह कहकर मना लिया गया था कि आपको राष्ट्रपति बनाया जाएगा. मुरली मनोहर जोशी को भी उपराष्ट्रपति बनाने की बात का संकेत दिया गया था. बाद में जो हालात बने, उसमें आडवाणी कभी भी खुश नहीं दिखे.
एक चर्चा तो यह भी चल रही है कि वर्तमान राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी को ही मोदी कंटीन्यू कर सकते हैं. क्योंकि, वे यह संदेश देना चाहते हैं कि हम विपक्ष के भी काबिल शख्स को देश का सर्वोच्च पद दे सकते हैं. क्योंकि, अबतक मुखर्जी ने पीएम मोदी को कोई मुश्किल खड़ी नहीं की है. कहा जा रहा है कि संघ अभी तैयार नहीं है मुखर्जी के नाम पर. संघ यह कभी नहीं चाहेगा कि क्यों कांग्रेसी, भाजपा के समर्थन से इस पद पर बैठे. आडवाणी पर न तो मोदी को भरोसा है और न ही संघ को. इसलिए आजकल फिर से वे कई मौकों पर अपनी नाराजगी जाहिर कर रहे हैं. उन्हें पता है कि विधानसभा चुनाव के खत्म होने के बाद राष्ट्रपति चुनाव की गहमागहमी शुरू हो जाएगी
ऐसे में सुषमा स्वराज का नाम संघ के ही एक धड़े की ओर से बढ़ाया जा रहा है. किडनी बदले जाने के बाद से उनको आराम देने की बात कही जा रही है. ऐसे भी विदेश मंत्रालय को राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल और पीएम मोदी ही मिल कर चला रहे हैं. पर, सुषमा के नाम पर पीएम को हिचक हो सकती है, क्योंकि वे अबतक आडवाणी खेमे की मानी जाती हैं.
इसके बाद सुमित्रा महाजन का नाम भी चर्चा में है. वे अपने सरल-सहज व्यवहार के चलते सबकी गुडबुक में हैं. प्रदेश से लेकर राष्ट्रीय स्तर तक और संघ भी उनके नाम पर राजी हो सकता है. यह भी संघ के एक धड़े की सोची-समझी चाल है कि विकल्प पहले सामने रख दो, ताकि दूसरे नामों पर विचार नहीं हो सके.
फिलहाल तो हवा में सुषमा स्वराज और सुमित्रा महाजन का नाम सबसे आगे चल रहा है. दोनों के पीछे जो कारण हैं, उनको खारिज करना भी मुश्किल है.

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