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संजय दत्त चंद दिन केलिए आर्थर रोड जेल के “अंडा” सेल में

मुंबई 21 मई ( पी टी आई )अदाकार संजय दत्त कुछ महिनो के लिए आर्थर रोड जेल के अंडा सेल में रखे जाऐंगे । एक आली सतही पुलिस ओहदेदार ने कहा कि महाराष्ट्रा में ओहदेदारों के दरमयान इस मसले पर बेहस जारी है कि उन्हें मुंबई में रखा जाये या मुंबई स

मुंबई 21 मई ( पी टी आई )अदाकार संजय दत्त कुछ महिनो के लिए आर्थर रोड जेल के अंडा सेल में रखे जाऐंगे । एक आली सतही पुलिस ओहदेदार ने कहा कि महाराष्ट्रा में ओहदेदारों के दरमयान इस मसले पर बेहस जारी है कि उन्हें मुंबई में रखा जाये या मुंबई से बाहर मुंतक़िल कर दिया जाये ।

एडीशनल डायरेक्टर जनरल पुलिस (महाबस )मेरा बोरवानकर ने पी टी आई से कहा कि संजय दत्त को मुंतक़िल किया जाये या नहीं इस का फ़ैसला करने में हमें कुछ वक़्त लगेगा । हम अनक़रीब उन्हें कहीं मुंतक़िल नहीं करेंगे । 53 साला बॉलीवुड अदाकार फ़िलहाल आर्थर रोड जेल के अंडा सेल में रखे गए हैं ।

उन्हें 16 मई को सुप्रीम कोर्ट की दी हुई क़तई आख़िरी मोहलत के इख़तेताम पर 16 मई को ख़ुद सुपुर्दगी के बाद आर्थर रोड जेल मुंतक़िल किया गया था । उनकी ख़ुदसपुर्दगी के बाद ये क़ियास आराईयां जारी थीं कि उन्हें पुणे की जेल मुंतक़िल किया जाएगा ।उसकी वजूहात संजय दत्त के बारे में ग़ैर यक़ीनी कैफ़ीयत के आख़िर कार उन्हें कहाँ रखा जाएगा इस वजह से हैं कि कई मुजरिमों के बारे में मालूमात ,सयान्ती हालात ,रियासत की मुख़्तलिफ़ जेलों में जैसे किलो जा ( नवी मुंबई ), यरावदा (पुणे ) थाने और नासिक की जेलों में अंडरवर्ल्ड से ताल्लुक़ रखने वाले क़ैदीयों की मौजूदगी वग़ैरा हैं ।

ओहदेदार मुख़्तलिफ़ पहलुओ का खासतौर पर सयान्ती मसाइल का जायज़ा ले रहे हैं इसके बाद ही अदाकार की मुंतक़ली का फ़ैसला किया जाएगा । हालाँकि शहर की जेल में चंद मुजरिम क़ैद हैं आम तौर पर इस जेल को ज़ेर दरयाफ़त क़ैदीयों के लिए इस्तेमाल किया जाता है । संजय दत्त को मज़ीद 42 माह की सज़ाए क़ैद भुगतनी है। 1993 के मुक़द्दमे में सुप्रीम कोर्ट ने उनकी सज़ाए क़ैद की तौसीक़ करते हुए क़ैद की मीयाद में एक साल की कमी करदी है ।

वो पहले ही 18 माह की क़ैद भुगत चुके हैं । अदाकार की रातें बेचैनी और मज़हबी सहीफ़ों के मुताला में गुज़र रही है ।दत्त के वकील ने टाडा अदालत से ज़बानी दरख़ास्त की थी कि उन्हें इंतिहाई सयान्ती इंतेज़ामात वाले अंडा सेल में रखने से उन्हें घुटन का एहसास होरहा है । इस कमरे में काफ़ी रोशनी भी नहीं है और न ये कमरा हुआदार हैं । उनके वकील रिज़वान मरचैंट ने कहा कि ये कमरा आम तौर पर सख़्त गीर मुजरिमों के लिए इस्तेमाल किया जाता है ।

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