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संदिग्ध का दावा, योगी आदित्यनाथ के साथ अजमेर ब्लास्ट के दोषी सुनील जोशी ने की थी मीटिंग

अजमेर बम ब्लास्ट के एक संदिग्ध का चौंकाने वाला खुलासा सामने आया है। यह खुलासा उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से जुड़ा है। इंडियन एक्सप्रेस अखबार ने एक आरोपी के हवाले से लिखा है कि एनआईए को भरत मोहनलाल रतेशवर नाम के आरोपी ने बताया था कि ब्लास्ट मामले का तीसरा दोषी सुनील जोशी, जिसकी हत्या साल 2007 में मध्य प्रदेश में हत्या हो गई थी, उसने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री और भाजपा के फायरब्रांड नेता योगी आदित्यनाथ से मुलाकात की थी।

रतेशवर ने एनआईए को बताया था, “हम एक आश्रम के गेस्ट हाउस में रुके थे। रात के लगभग 9 बजे थे और मैं और जोशी आदित्यनाथ से मिलने उनके घर के हाल में गए थे। वहां जाकर मैं कुछ दूरी पर खड़ा हो गया। लेकिन जोशी आदित्यनाथ के करीब जाकर बैठ गया। दोनों बड़े ही गुप्त तरीके से धीमी आवाज में बातें कर रहे थे।”

रतेशवर के बयान के मुताबिक, स्वामी असीमानंद ने उसे सुनील जोशी के साथ गोरखपुर समेत झारखंड, आगरा और नागपुर जाने को कहा था। वहीं चार्जशीट के अनुसार, रतेशवर और जोशी इंदौर में मिलने के बाद चितरंजन पहुंचे जहां उन्हें लेने आरएसएस का जिला प्रचारक देवेंद्र गुप्ता पहुंचा। वे दो दिन जमतारा में रहे और फिर आगरा के लिए निकल गए। आगरा में वह राजेश्वर सिंह से मिले जो उन्हें गोरखपुर ले गया। गोरखपुर पहुंचने के अगले दिन उन दोनों की मुलाकात योगी आदित्यनाथ से उनके गोरखपुर स्थित आश्रम पर हुई।

वहीं दूसरी तरफ इस मामले पर रतेशवर के काउसेल जे. एस. राणा ने कहा है कि उसका बयान एक गवाह के तौर पर लिया गया था। और बाद में उसे आरोपी बनाया गया। ऐसे में उसके बयान के कोई मायने नहीं। राजस्थान एटीएस और एनआईए की जांच के मुताबिक, मीटिंग आदित्यनाथ के गोरखपुर स्थित घर पर मार्च-अप्रैल 2006 में हुई थी। एनआईए ने बाद में यह दावा भी किया था कि दिसंबर 2007 में जोशी की हत्या के बाद उसकी जेब से जो डायरी बरामद की गई थी उसमें योगी आदित्यनाथ के कॉन्टैक्ट नंबर मिले थे।

गौरतलब है कि अजमेर बम ब्लास्ट मामले में बुधवार को एनआईए की एक कोर्ट ने देवेंद्र गुप्ता और भावेश पटेल को उम्र कैद की सजा सुनाया है। सजा तय करने से पहले कोर्ट ने 8 मार्च को तीन आरोपियों को दोषी करार दिया था जिसमें से सुनील जोशी की मौत रहस्यमय परिस्थितियों में साल 2007 में हो गई थी।

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