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सईद अनवर और हेडन के नक़्शा क़दम पर चलना चाहता हूँ: जमशेद

पाकिस्तानी क्रिकेट टीम के ओपनर नासिर जमशेद ने इन्किशाफ़ किया है कि क्रिकेट के शौक़ की ख़ातिर उन्होंने अमेरीकी शहरीयत लेने से इनकार कर दिया था। नासिर के बमूजब एशिया कप को आख़िरी मौक़ा समझ कर मैदान में उतरने के नतीजा में वो सुर ख़रु हुए।

पाकिस्तानी क्रिकेट टीम के ओपनर नासिर जमशेद ने इन्किशाफ़ किया है कि क्रिकेट के शौक़ की ख़ातिर उन्होंने अमेरीकी शहरीयत लेने से इनकार कर दिया था। नासिर के बमूजब एशिया कप को आख़िरी मौक़ा समझ कर मैदान में उतरने के नतीजा में वो सुर ख़रु हुए।

लाहौर से ताल्लुक़ रखने वाले नासिर जमशेद ने एशिया कप में हिंदूस्तान के ख़िलाफ़ टीम को डबल सेंचुएयरी और बंगला देश के ख़िलाफ़ सेंचुएयरी रिफ़ाक़त निभाई थी और पाकिस्तान को 12 बरस बाद पहली मर्तबा अहम ख़िताब दिलाने में मर्कज़ी किरदार अदा किया।

एक जर्मन रेडीयो को दिए गए ख़ुसूसी इंटरव्यू में नासिर जमशेद ने कहा कि एशिया कप जीतने की ख़ुशी अल्फ़ाज़ में ब्यान नहीं कर सकता। मैं जीत के बाद ढाका में सजदा रेज़ हो गया था और इख़तेतामी तक़रीब में पाकिस्तान की एशीयन चैम्पियन टीम का हिस्सा होने पर फ़ख़र महसूस कर रहा हूँ।

एशिया कप में हिंदूस्तान के ख़िलाफ़ यादगार सेंचुएयरी को नासिर जमशेद एक ख़ाब की ताबीर क़रार देते हैं। नासिर ने कहा कि 2008 में हिंदूस्तान के ख़िलाफ़ खेलते हुए निस्फ़ सेंचुएयरी के बाद ज़ख्मी हो गया था, इसलिए मैच की रात मैंने रिवायती हरीफ़ के ख़िलाफ़ इनिंग्स वहीं से शुरू करने का तहय्या किया जहां कराँची में ज़ख्मी हो कर दस्तबरदार हुआ था और इसी के नतीजे में हिंदूस्तान के ख़िलाफ़ करीयर की पहली सेंचुएयरी स्कोर की।

नासिर के मुताबिक़ टेस्ट टीम की नुमाइंदगी करना उनकी दिल्ही तमन्ना है और वैसे भी असर-ए-हाज़िर की टेस्ट क्रिकेट में स्ट्रोक प्लेयर को ही ज़्यादा कामयाबी मिल रही है, इसलिए वो पुर उम्मीद हैं कि जल्द ही ये ख़ाहिश भी पूरी हो जाएगी।

नासिर जमशेद ने अपने करीयर की इबतिदा 2008 में ज़िमबांवे और हिंदूस्तान के ख़िलाफ़ वन डे क्रिकेट में निस्फ़ सेंचुएयरीयाँ बना कर की थी लेकिन पौने तीन बरस बाद टीम में वापसी के लिए उन्हें काफ़ी काफ़ी जद्द-ओ-जहद करनी पड़ी।

इस ख़सूस में नासिर जमशेद ने कहा कि डोमेस्टिक क्रिकेट में मुसलसल कारकर्दगी दिखाने के बावजूद नज़रअंदाज किए जाने पर उन्हें कई मर्तबा मायूसी हुई लेकिन उन्होंने हिम्मत का दामन नहीं छोड़ा और बैट के ज़रीया ही आख़िर कार सेलेक्टरों को क़ाइल करने में कामयाब हुए।

माजिद, सादिक़, मुहसिन , मुदस्सर और सईद अनवर , आमिर सुहेल के बाद पाकिस्तान को कोई बेहतर ओपनर्स की जोड़ी ना मिल सकी थी। ताहम अब नासिर जमशेद और मुहम्मद हफ़ीज़ की जोड़ी बनने के बाद पाकिस्तानी ओपनिंग का मसला हल होता नज़र आ रहा है। इस हवाले से नासिर जमशेद कहते हैं ओपनिंग एक मुश्किल शोबा है लेकिन मुहम्मद हफ़ीज़ एक तज़ुर्बाकार खिलाड़ी हैं और उनके साथ खेल कर मुझे बहुत कुछ सीखने को मिल रहा है।

एशिया कप के बाद 22 साला नासिर जमशेद के मद्दाहों की तादाद में बेपनाह इज़ाफ़ा हुआ है लेकिन ख़ुद नासिर जमशेद मैथीयू हेडन और सईद अनवर के नक़्श-ए-क़दम पर चलना चाहते हैं। इन्होंने कहा कि हेडन के खेलने का जारिहाना अंदाज़ उन्हें पसंद है जबकि यू टयूब पर सईद अनवर की बैटिंग मुसलसल देखने से भी उन्होने बहुत कुछ सीखा है।

नासिर जमशेद के चचाज़ाद ज़ुलक़ुरनैन भी 1980के दहिय में पाकिस्तान की टेस्ट और वन डे क्रिकेट में नुमाइंदगी कर चुके हैं। लाहौर से ताल्लुक़ रखने वाले नासिर के वालदैन अमेरीकी शहरी हैं अलबत्ता ख़ुद नासिर क्रिकेट की ख़ातिर अमरीकी शहरीयत ठुकरा चुके हैं।

इस हवाले से पाकिस्तानी क्रिकेटर का कहना था एक मौक़ा पर मैं क्रिकेट छोड़कर अमरीका चला गया था लेकिन वालदैन ने क्रिकेट जारी रखने का हौसला दिया।

और अंडर 19 आलमी कप में नाम आने पर मैं वापस वतन आ गया और इस तरह शौक़ की ख़ातिर अमेरीकी पासपोर्ट लेने से भी इन्कार कर दिया।

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