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सऊदी अरब की ई वीजा बनी मुसीबत

लखनऊ। कभी कभी तकनीक समस्या बन जाती है। ऐसा ही कुछ सऊदी अरब द्वारा इस वर्ष से शुरू की गई ई-वीजा व्यवस्था को लेकर सामने आ रहा है।

इसे सऊदी गोवर्मेंट ने शुरू तो किया है हज पर जाने वालों को वीजा संबंधी समस्याओं से मुक्ति दिलाने के लिए , पर इसकी वजह से ही या तो कई हज पर नहीं जा सके और कई को सऊदी पहुँचने के बाद भी हज के अरकान यानि क्रियाओं में शामिल होने का मौका नहीं मिला । उन्हें बैरंग लौटा दिया गया।

ऐसे बदनसीबों में अम्बेडकर नगर की सबिकुननिस, उनके पति मोहम्मद निहाल भी हैं। रविवार को अपने दो रिश्तेदारों के साथ जब लखनऊ के अमौसी हवाई अड्डे पर पहुंचे तो तमाम औपचारिकताओं के बाद जब सबिकुन का वीजा कंप्यूटर पर खोलने का प्रयास किया गया तो नहीं खुला। इस वजह से उन्हें हज पर जाने रोक दिया गया। पत्नी नहीं जा सकीं तो पति भी नहीं गए। उनके दोनों रिश्तेदारों का वीजा कंप्यूटर पर आसानी से खुल गया। इसलिए उन्हें हज पर जाने की इजाज़त मिल गई। ऐसे बदकिस्मतों की सूची में उत्तर प्रदेश के सिद्धार्थ नगर की शकिरुननिस भी हैं। पहले दिन की उड़ान में वह बुधवार को ही सऊदी अरब को रवाना हो गईं,पर मदीना एयर पोर्ट पर कंप्यूटर में उनका वीजा नहीं खुला। इस लिए उन्हें वहीँ से मुम्बई भेज दिया गया। उनके शौहर का वीजा ओपन हो गया और वह हज में शामिल हो गए। वाया मुम्बई शकिरून निस रविवार को लखनऊ लौट आई हैं। हज कमिटी के उप कार्यपालक अधिकारी तनवीर अहमद ने इस बारे में पूछने पर बताया कि दोबारा ऐसे हज यात्रियों का वीजा लगवाने को हज कमिटी ऑफ़ इंडिया के पास भेजा जा रहा है। समय पर उनका दोबारा वीजा लग जाएगा। इसमें लोग संशय जाहिर कर रहे हैं।
बता दूँ कि आखिर सऊदी सरकार की हाजियों के लिए ई वीजा क्या है। वहां की सरकार पहले पासपोर्ट पर ही वीजा स्टैम्प लगाती थी। मगर कई बार स्टैम्प साफ नहीं होने के कारण तस्दीक करने में मुश्किल होती थी। इस समस्या को दूर करने के लिए नई व्यवस्था इस साल से शुरू की गई। ताकि कंप्यूटर पर कहीं भी किसी का वीजा खोला जा सके, पर इसकी जगह हो कुछ और रहा है। लखनऊ एअरपोर्ट से अबतक कुल 3896 लोग हज यात्रा को रवाना हो चुके हैं।

एम ए हाशमी

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