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सऊदी अरब में अब नौकरी करना होगा मुश्किल

अपने शहरियों को ज्यादा से ज्यादा नौकरियों के मौके फराहम कराने के लिए सऊदी अरब फिर कानून बदलने की तैयारी में है। नए कानून के तहत माइग्रेंट्स (Migrant) ज़्यादा से ज़्यादा आठ साल तक ही सऊदी अरब में रह सकेंगे।

अपने शहरियों को ज्यादा से ज्यादा नौकरियों के मौके फराहम कराने के लिए सऊदी अरब फिर कानून बदलने की तैयारी में है। नए कानून के तहत माइग्रेंट्स (Migrant) ज़्यादा से ज़्यादा आठ साल तक ही सऊदी अरब में रह सकेंगे।

इससे बड़ी तादाद में हिंदुस्तानी शहरियों के मुतास्सिर होने का खदशा जताई जा रही है। मुतनाज़ा कानून का दायरा बढ़ाने के लिए तजवीज के मुताआला में जुटे सऊदी अरब के मिनिस्ट्री आफ लेबर ने इस नए कानून की तजवीज रखी है। इसका मकसद मुल्क में गैर मुल्की कामगारों की तादाद घटाना और मुल्क वालो के लिए अच्छी पगार वाली ज्यादा से ज्यादा नौकरियां पैदा करना है।

मजूज़ा कानून (Proposed Law) के तहत सऊदी में बीवी और दो बच्चों के साथ रह रहे Migrant workers को दो गैर मुल्की कामगारों के तौर पर गिना जाएगा। यह कानून हालांकि फिलस्तीन जैसे मुल्कों के शहरियों पर लागू नहीं होगा, जिन्हें उनके मुल्क वापस नहीं भेजा जा सकता।

मुकामी अखबार के मुताबिक इस नए कानून की तजवीज उस मुताआला (Study) के बाद किया गया है जिसमें कहा गया था कि हुनर मंद कामगारों के मुकाबले गैर हुनरमंद कामगार ज़्यादा सालों तक सऊदी में टिके रहते हैं। वैसे इस मजूज़ा कानून का सऊदी अरब में ही मुखालिफत भी हो रही है।

माहिरीन का कहना है कि इससे गैर मुल्की पेशेवर सऊदी अरब में काम करने से कतराएंगे और यह मुल्क के कारोबार पर मनफी असर डालेगा।

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