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सऊदी में जबरन कराया गया सफाईकर्मी का काम

इंडिया से सऊदी अरब गये सात भारतीयों से जबरन सफाईकर्मी का काम लिया गया। पेट की भूख मिटाने के एवज में 43 दिनों तक उनसे गंदगी साफ करने का काम लिया जाता रहा। जब उन्होंने भारतीय सिफ़ारत खाने में इसकी शिकायत की, तो उन्हें एक कमरे में 12 दिनों

इंडिया से सऊदी अरब गये सात भारतीयों से जबरन सफाईकर्मी का काम लिया गया। पेट की भूख मिटाने के एवज में 43 दिनों तक उनसे गंदगी साफ करने का काम लिया जाता रहा। जब उन्होंने भारतीय सिफ़ारत खाने में इसकी शिकायत की, तो उन्हें एक कमरे में 12 दिनों तक बंद करके भूखा रखा गया।

इस जुल्म के शिकार हुए लोगों में से एक नौजवान आजादबस्ती जमशेदपुर रिहायसी मो शाहनवाज है। इनके अलावा राजस्थान के मो रइस, मो साकिब, मो अकरम, अब्दुल रहीम और नंद किशोर भी उन लोगों में शामिल हैं, जिन्हें यह परेशानी झेलनी पड़ी। शाहनवाज के मुताबिक जुलाई 2007 में उन्हें साउदी भेजा गया था।

43 दिन परेशान करने के बाद 19 सितंबर को उन्हें दमाम में लाकर कमरे में बंद कर दिया गया। यहां 12 दिन रहने के बाद अक्तूबर के पहले हफ्ताह में ही तमाम भारत वापस पहुंचे। जुलाई में जमील ने एयर लाइंस टूर एंड ट्रेवल्स जमशेदपुर के जरिये से उन्हें सऊदी अरब भेजा था। उसे मेकेनिकल हेल्पर के ओहदे पर जद्दा वाक़ेय अलकुदरी कंपनी में भेजा गया था।

बताया गया कि 750 रियाल यानि 11 हजार रुपये फी महीने मिलेंगे। सऊदी अरब जाने में तकरीबन 40 हजार रुपये का खर्च आया। जब वे दमाम से जद्दा पहुंचे, तो उन्हें बलदिया (सफाइकर्मी) का काम करने को कहा गया। इनकार करने पर तमाम के साथ जुल्म किया गया। उन्हें जबरन सफाई के काम में लगाया गया।

मुसलसल 43 दिनों तक उन्हें परेशान किया गया। भारतीयों ने जब भारत वापस भेजने की दरख्वास्त कंपनी से किया, तो उनसे साढ़े तीन हजार रेयाल यानि तकरीबन 56 हजार रुपये जमा कराने को कहा गया। इसी दौरान सातों भारतीयों ने भारतीय सिफ़ारत खाने से राब्ता किया और अपनी शिकायतें दर्ज करायी। 22 दिनों की जांच पड़ताल के बाद भारतीय सिफ़ारत खाने ने कंपनी को गलत करार दिया और तमाम भारतीयों को वापस भारत भेजने को कहा।

कंपनी को जब इसकी जानकारी मिली, तो जद्दा से दमाम ले जा कर सातों भारतीयों को एक कमरे में छोड़ दिया गया। उन्हें खाना भी देना बंद कर दिया गया। 12 दिनों तक एक ही कमरे में भारतीयों ने वक़्त गुजारा। इस दौरान उन्हें कई दिनों तक भूखे भी रहना पड़ा। 12 दिनों के बाद कंपनी की तरफ से पासपोर्ट, एयर टिकट देकर हिंदुस्तान वापस भेजा गया। अकबर के मुताबिक उसी कंपनी के और 25 हिंदुस्तानियों ने हमारे बाद शिकायत दर्ज करवायी है। भारतीय सिफ़ारत खाना इसकी तफ़सीश कर रही है।

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