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सदर जमहूरीया के पास रहम की 18 दरख़ास्तें ज़ेर इल्तिवा

मुल्क में सदर जमहूरीया के 1998 से अब तक रहम से मुताल्लिक़ 18 दरख़ास्तों को मुस्तर्द करने और उतनी ही रहम की दरख़ास्तें मुल्तवी रखने की वजह से हुकूमत और सयासी पार्टीयां वोटों की ख़ातिर सदर जमहूरीया की आड़ में सियासत करने में मसरूफ़ हैं जिसस

मुल्क में सदर जमहूरीया के 1998 से अब तक रहम से मुताल्लिक़ 18 दरख़ास्तों को मुस्तर्द करने और उतनी ही रहम की दरख़ास्तें मुल्तवी रखने की वजह से हुकूमत और सयासी पार्टीयां वोटों की ख़ातिर सदर जमहूरीया की आड़ में सियासत करने में मसरूफ़ हैं जिससे अदालती निज़ाम पर ज़रब लग रहा है और तफतीशी अफ्स्रान की हौसला शिकनी हो रही है।

आर टी आई कारकुन गोपाल दास के हक़ इत्तेलाआत ( खबर) क़ानून के तहत तलब की गई मालूमात के मुताबिक़ सदारती सेक्रेट्रेट ने ये इत्तिला दी है। सुप्रीम कोर्ट ने भी हाल ही में मर्कज़ी हुकूमत को सदर जमहूरीया के पास ज़ेर इल्तिवा रहम की दरख़ास्तों की तफ्सील पेश करने का ज़बानी हुक्म देविन्द्र पाल सिंह भुल्लर की अपील की समाअत के दौरान देते हुए दो बरसों से ज़्यादा वक़्त से ज़ेर इल्तिवा ऐसी दरख़ास्तों का जायज़ा लेने की बात कही है।

सदर जमहूरीया ने रहम की जिन 18 दरख़ास्तों पर फ़ैसला दिया है इन में से चार को ख़ारिज कर दिया गया था और बाक़ी 14 की फांसी की सज़ा को उम्र क़ैद में बदल दिया था। मग़रिबी बंगाल के धनंजय चटर्जी, आसाम के महेन्द्र नाथ दास, दिल्ली के देवेंद्र पाल सिंह और तमिलनाडू में साबिक़ वज़ीर-ए-आज़म राजीव गांधी के क़त्ल के जुर्म में फांसी की सज़ा याफ्ता सनथन, मोरो गुण और एरवेव की रहम की दरख़ास्त ख़ारिज कर दी गई थी।

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