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सदर जमहूरीया पर तन्क़ीद के सिलसिला में टीम अना में इख़तिलाफ़ात

टीम अन्ना की ग़ैर मुअय्यना मुद्दत की आज हड़ताल में राम देव ने बहुत कम हुजूम ( भीढ़) इकट्ठा किया। ताहाल ये भूक हड़ताल ज़्यादा रद्द-ए-अमल हासिल करने से क़ासिर रही है, लेकिन नए सदर जमहूरीया परनब मुकर्जी पर तन्क़ीद (समीक्षा) के सिलसिला में टीम

टीम अन्ना की ग़ैर मुअय्यना मुद्दत की आज हड़ताल में राम देव ने बहुत कम हुजूम ( भीढ़) इकट्ठा किया। ताहाल ये भूक हड़ताल ज़्यादा रद्द-ए-अमल हासिल करने से क़ासिर रही है, लेकिन नए सदर जमहूरीया परनब मुकर्जी पर तन्क़ीद (समीक्षा) के सिलसिला में टीम अन्ना में फूट नुमायां हो गई है।

आज सुबह भूक हड़ताल के मुक़ाम ( जगह) पर अवाम का हुजूम ( भीढ़) बहुत मामूली था, लेकिन राम देव की आमद के बाद इस में इज़ाफ़ा हो गया। अन्ना हज़ारे के साथीयों की भूक हड़ताल जंतर मंत्र पर मुनाक़िद की जा रही है। राम देव के हामी ( साथी) उन के साथ एक जलूस की शक्ल में भूक हड़ताल के मुक़ाम पर पहुंचे।

वो राम लीला मैदान में जंतर मंत्र आए थे। राम देव काले धन के ख़िलाफ़ राम लीला मैदान पर 9 अगस्त से एहतिजाज का मंसूबा रखते हैं। इन की आमद से टीम अन्ना के अरकान के चेहरों पर कुछ राहत के आसार नुमायां हुए। टीम अना के हामीयों ने ज़राए इबलाग़ पर इल्ज़ाम आइद किया कि उन्होंने इस एहतिजाज को मसतहक़ा ( खास) एहमीयत नहीं दी, जिस की वजह से अवाम बहुत कम तादाद में मौजूद हैं।

हालाँकि उन्होंने वज़ीर-ए-आज़म पर तन्क़ीद की लेकिन योगा गुरु ने टीम अन्ना के सदर जमहूरीया पर इल्ज़ामात आइद करने पर इस से इत्तिफ़ाक़ नहीं किया और कहा कि आला तरीन दस्तूरी ओहदा पर फ़ाइज़ शख़्स पर तन्क़ीद नामुनासिब है। राम देव ने भी कहा कि वो टीम अन्ना की तहरीक की ताईद जारी रखेंगे, लेकिन वो किसी पर भी शख़्सी तन्क़ीद के मुख़ालिफ़ ( विरोध) हैं।

सदर का ओहदा एक दस्तूरी ओहदा है। दस्तूरी ओहदों पर फ़ाइज़ अफ़राद पर तन्क़ीद नहीं की जानी चाहीए। उन्हों ने कहा कि अन्ना हज़ारे भी उन की राय से इत्तिफ़ाक़ करते हैं। वो टीम अन्ना के एहतिजाज ( प्रदर्शन) के मुक़ाम के लिए रवाना होने से क़बल राम लीला मैदान पर प्रेस कान्फ्रेंस से ख़िताब कर रहे थे।

एहतिजाज के मुक़ाम पर भी राम देव ने वज़ीर-ए-आज़म पर तन्क़ीद की और कहा कि मुल्क में तबदीली लाने के लिए एक दयानतदार वज़ीर-ए-आज़म की ज़रूरत है। उन्हों ने कहा कि हुकूमत का फ़र्ज़ मुल्क में सिर्फ मआशी ( आर्थिक) ख़ुशहाली लाना नहीं बल्कि दुनिया भर में मुल्क को एक काबिल फ़ख़र मुक़ाम दिलाना है, लेकिन हमारे वज़ीर-ए-आज़म को तवक़्क़ो ( उम्मीद) से कम कारनामे अंजाम देने वाला क़रार दिया जा रहा है। ये मज़ाक़ का नहीं बल्कि शर्मनाक मुआमला है।

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