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सदर जमहूरीया (राष्ट्रपती) के लिए आन्ध्र प्रदेश से ताईद (सपोर्ट) का फ़ैसला दुशवार कुन (मुश्किल)

सदर जमहूरीया (राष्ट्रपती) के ओहदे के लिए मर्कज़ में बरसर-ए-इक्तदार (सत्ता पक्ष) यू पी ए और अप्पोज़ीशन एन डी ए के दरमयान जिस तरह रसा कशी जारी है इस के दरमयान आन्ध्र प्रदेश की तीन सयासी जमातों के लिए किसी एक उम्मीदवार की ताईद (सपोर्ट) का फ़ैसला आसान नहीं होगा ।

अगर यू पी ए और उन डी ए दोनों अपना उम्मीदवार खड़ा करें तो तेलगु देशम , वाई एस आर कांग्रेस पार्टी और तेलंगाना राष़्ट्रा समीती को उम्मीदवार की ताईद (सपोर्ट) के सिलसिला में मुश्किलात का सामना करना पड़ सकता है क्योंकि तीनों जमातें किसी ना किसी तरह दोनों महाज़ों से दूरी बरक़रार रखे हुए हैं जो कि इन के लिए बेहतर भी है

अगर सदारती इंतिख़ाब (चुनाव) के लिए मुक़ाबला होगा तो कांग्रेस के बाद सब से ज़्यादा वोट तेलगु देशम के पास होंगे जिस के पास 86 अरकान असैंबली और 7 अरकान-ए-पार्लीमैंट हैं इन डी ए इस बात की कोशिश करेगी कि वो इस के उम्मीदवार के लिए तेलगु देशम की ताईद (सपोर्ट) हासिल करे । तेलगु देशम फ़िलवक़्त एन डी ए और यू पी ए में किसी भी महाज़ का हिस्सा नहीं है बल्कि वो एक तवील अर्सा (लम्बे समय) से तीसरे महाज़ के क़ियाम की कोशिश कर रहा है ।

चंद्रा बाबू नायडू सदारती उम्मीदवार की ताईद (सपोर्ट) के सिलसिला में बाएं बाज़ू जमातों से मुशावरत (बात चीत) के बाद कोई फ़ैसला कर सकते हैं लेकिन कांग्रेस ज़ेर क़ियादत यू पी ए इत्तिहाद के उम्मीदवार की ताईद (सपोर्ट) उन के लिए आसान नहीं । अगर वो इन डी ए उम्मीदवार की ताईद (सपोर्ट) का फ़ैसला करते हैं तो इस से अक़ल्लीयतों में नाराज़गी का अंदेशा पैदा होगा।

यही हाल टी आर एस और वाई एस आर कांग्रेस का भी है इन दोनों जमातों के फ़िलवक़्त 17,17 अरकान असैंबली और 2-2 अरकान-ए-पार्लीमैंट हैं । वाई एस आर कांग्रेस पार्टी के हक़ में बाअज़ कांग्रेसी अरकान असैंबली अंदरूनी तौर पर ताईद (सपोर्ट) कर रहे हैं । इन दोनों जमातों के लिए भी यू पी ए और उन डी ए उम्मीदवारों में किसी एक का इंतिख़ाब (चुनाव) करना आसान नहीं ।

वाई एस आर कांग्रेस पार्टी किसी भी सूरत में कांग्रेस ज़ेर क़ियादत यू पी ए उम्मीदवार की ताईद (सपोर्ट) नहीं कर सकती और उन डी ए उम्मीदवार की ताईद (सपोर्ट) से अक़ल्लीयतों में नाराज़गी पैदा होगी । किसी भी फ़ैसले से क़ब्ल उसे काफ़ी ग़ौर-ओ-ख़ौस करना होगा । तेलंगाना राष़्ट्रा समीती की ताईद (सपोर्ट) के लिए वज़ीर-ए-आज़म (प्रधान मंत्री) डाक्टर मनमोहन सिंह ने कल चंद्रा शेखर राव से फ़ोन पर रब्त पैदा किया था लेकिन चंद्रा शेखर राव ने उन्हें कोई तैक़ुन नहीं दिया ।

अलिहदा तेलंगाना मसला पर चंद्रा शेखर राव को यू पी ए से तल्ख़ तजुर्बा हो चुका है । 9 दिसंबर 2009 को मर्कज़ ने तेलंगाना की तशकील का ऐलान करते हुए इस से इन्हिराफ़ कर लिया था । दिलचस्प बात तो ये है कि तेलंगाना की मुख़ालिफ़त में परनब मुकर्जी पेश पेश रहे जो कि यू पी ए के सदारती उम्मीदवार हैं । इस तरह मुख़ालिफ़ तेलंगाना शख़्सियत की ताईद (सपोर्ट) टी आर एस के लिए आसान नहीं ।

बताया जाता है कि वज़ीर-ए-आज़म (प्रधान मंत्री) को फ़ोन के बाद चंद्रा शेखर राव ने पार्टी क़ाइदीन (नेताओं) से इस मसला पर मुशावरत (बात चीत) की । टी आर एस के लिए मुश्किल ये है कि वो अब इन डी ए के साथ नहीं जा सकती । क्योंकि महबूब नगर और परकाल के इंतिख़ाबात (चुनाव) में बी जे पी ने टी आर एस के ख़िलाफ़ अपना उम्मीदवार खड़ा किया और महबूब नगर में टी आर एस उम्मीदवार की शिकस्त के लिए बी जे पी ज़िम्मेदार है ।

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