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सदर मिस्र, क़ैद सहाफ़ीयों पर मुक़द्दमा ना चलाने के ख़ाहां

सदर मिस्र अब्दुल फ़ताह अलसीसी ने कहा कि वो चाहते हैं कि अल-जज़ीरा के तीन सहाफ़ीयों बाशमोल एक ऑस्ट्रेलियाई शहरी को मुल्क से ख़ारिज कर दिया जाये और उन पर मुक़द्दमा ना चलाए जाये। उन्हों ने एतराफ़ किया कि ये आला सतह का मुक़द्दमा मुल्क के लिए

सदर मिस्र अब्दुल फ़ताह अलसीसी ने कहा कि वो चाहते हैं कि अल-जज़ीरा के तीन सहाफ़ीयों बाशमोल एक ऑस्ट्रेलियाई शहरी को मुल्क से ख़ारिज कर दिया जाये और उन पर मुक़द्दमा ना चलाए जाये। उन्हों ने एतराफ़ किया कि ये आला सतह का मुक़द्दमा मुल्क के लिए तबाहकुन साबित होगा।

गुज़िश्ता माह मिस्री अदालत ने ऑस्ट्रेलियाई नामा निगार पीटर ग्रीस्ट, कैनेडा के शहरी मिस्री नज़ाद मुहम्मद फ़हमी और अल-जज़ीरा के इंग्लिश क़ाहिरा ब्यूरो चीफ़ बहीर मुहम्मद को 10 साल की सज़ाए क़ैद सुनाई थी। उन पर इल्ज़ाम था कि वो ममनूआ तंज़ीम इख़्वानुल मुस्लमीन की मदद कर रहे हैं।

23 जून को सज़ाए क़ैद सुनाने को इंतिहाई मन्फ़ी असरात मुरत्तिब करने वाला फ़ैसला क़रार देते हुए सदर मिस्र अलसीसी ने ऐडीटर्स के साथ अपने इजलास में कल एतराफ़ किया।

रोज़नामा अलमिसरी अल यौम की ख़बर के बामूजिब अलसीसी ने कहा कि कई सहाफ़ीयों को सज़ाए मौत देने के इंतिहाई मन्फ़ी असरात मुरत्तिब होंगे और हमें ऐसा कोई काम नहीं करना चाहीए।

उन्हों ने ऐसे ग़लत मवाद नशर किए थे, जिन से क़ौमी सलामती को नुक़्सान पहुंचा था और वो मिस्रियों के एक ग्रुप को रक़म, आलात और मालूमात फ़राहम कर रहे थे।

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