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सदर सालेह के बाद दहश्तगर्दी के ख़िलाफ़ तआवुन(मदद) में बेहतरी

हाल ही में अमरीका जाने वाले मुसाफ़िर बर्दार (पसिंजर जहाज़ )हवाई जहाज़ को बम से उड़ाने की जिस साज़िश को नाकाम बनाया गया है, वो यमन में तैय्यार की गई थी।यमन में सियासी और समाजी ख़लफ़िशार की वजह से अलक़ायदा के एक धड़े को यमन के बाअज़ इ

हाल ही में अमरीका जाने वाले मुसाफ़िर बर्दार (पसिंजर जहाज़ )हवाई जहाज़ को बम से उड़ाने की जिस साज़िश को नाकाम बनाया गया है, वो यमन में तैय्यार की गई थी।यमन में सियासी और समाजी ख़लफ़िशार की वजह से अलक़ायदा के एक धड़े को यमन के बाअज़ इलाक़ों में जहां ला क़ानूनीयत (जहां कानुन न हो)का दौर दौरा है, क़दम जमाने का मौक़ा मिल गया है।अफ़्ग़ानिस्तान में भी अलक़ायदा की इबतिदा इसी तरह हुई थी।

ताहम, ऐसा लगता है कि यमन के सदर अली अबदुल्लाह सालेह के रुख़स्त होने के बाद, यमन में दहश्तगर्दी के इंसिदाद(ख़त्म करने ) की कोशिशों में, ग़ैर मुल्की एजैंसीयों के साथ तआवुन(मदद) किसी हद तक बेहतर हो गया है । उन के रुख़स्त होने के बाद, ऐसा महसूस होता है कि नई इंतिज़ामीया , हर चीज़ पर इस तरह तन्क़ीद नहीं करती जैसी वो करते थे।

जिस ज़माने में सदर सालेह का तख़्ता उल्टने के लिए एहतिजाज हो रहे थे, उस वक़्त उन्हों ने ख़ुद को जिहादीयों की दहश्तगर्दी के ख़िलाफ़ नागुज़ीर ताक़त के तौर पर पेश किया था। लेकिन फ़ाउंडेशन फ़ार डीफ़ैंस आफ़ डेमोक्रेसीज़ के फ़ैलो सबसटीन गुरू का कहते हैं कि साबिक़ यमनी लीडर सिर्फ बातें ही करते थे।सालेह ने बाअज़ ऐसी बातें कही होंगी कि दुनिया के इस हिस्से में वो बुनियाद परस्तों या सलफ़ियों के ख़िलाफ़ अमरीका की आख़िरी उम्मीद हैं।

लेकिन मीडीया की रिपोर्टों और तजज़ियों से ये बात साफ़ ज़ाहिर है कि वो एक तरफ़ वाशिंगटन और मग़रिब से कुछ कहते थे , और दरपर्दा वो अपने मुल्क में, जिहादीयों और सलफ़ियों से मिले हुए थे ता कि अपना इक़तिदार बरक़रार रख सकें। सालेह ये खेल सिर्फ़ अमरीका के साथ नहीं, बहुत से मुल्कों के साथ खेल रहे थे।

सेंट्रल इन्टैलीजन्स एजैंसी के साबिक़ डायरेक्टर माईकल हाईडन कहते हैं कि मिस्टर सालेह के साथ इन्टैलीजन्स के ताल्लुक़ात ख़ासे मुश्किल थे। मैं कभी ये नहीं कहूंगा कि दहश्तगर्दी के इंसिदाद(ख़त्म करने ) में, सदर सालेह के साथ शराकतदारी(साझा) कोई आसान काम था। ऐसा लगता था कि इन के साथ मोज़ाकरात (बात चीत) का सिलसिला कभी ख़त्म नहीं होगा।

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