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सनातन और इस्लाम मिलाजुला मजहब : मौलाना उवाइदा कासमी

बोडेया नौजवान कमेटी के तहत बोडेया में 24 जनवरी की शाम मिलाद सिरातून नबी जलसा का एंकाद किया गया। इसकी शुरुवात हाफ़िज़ मोहम्मद याक़ूब साहेब ने कुरान तिलावत से की। बोडेया अंजुमन मदरसा के बच्चों ने नज़्म पेश किया। हज़रत मौलाना उवयदा कासमी

बोडेया नौजवान कमेटी के तहत बोडेया में 24 जनवरी की शाम मिलाद सिरातून नबी जलसा का एंकाद किया गया। इसकी शुरुवात हाफ़िज़ मोहम्मद याक़ूब साहेब ने कुरान तिलावत से की। बोडेया अंजुमन मदरसा के बच्चों ने नज़्म पेश किया। हज़रत मौलाना उवयदा कासमी ने सनातन मजहब और इस्लाम को मिलाजुला मजहब कहा।

इस मौके पर हज़रत मौलाना तल्हा नदवी ने कहा की हिन्दू और मुसलमान दोनों एक ही खुदा के भेजे गए मखलूख हैं। हिन्दू एक रहमदिल क़ौम है। खुदा ने दुनिया के सभी इन्सानों की अलग-अलग पहचान दी है। खुदा सभी को एक नज़र से देखते हैं। हिन्दू या मुसलमान में फर्क नहीं करता। मेरे नबी ने सभी को इस दुनिया में अच्छा रास्ता दिखलाया और मुहब्बत का पैगाम दिया।

उन्होने किसी मजहब और ज़ात के लोगों में फर्क नहीं समझा। हमारे नबी सभी इन्सानों के नबी हैं। कुरान सिर्फ मुसलमानों का नहीं है। ये दुनिया के तमाम इन्सानों के लिए है। मौलाना अख्तर ने भी नबी पर और हिन्दू-मुसलमानों की इत्तीहाद पर ज़ोर दिया। जलसे का एहतेमाम बोडेया के मुफ़्ती मोहम्मद अफ़रोज ने किया।

इस मौके पर हाजी मोहम्मद इलियास, मजीद अंसारी, गोविंद नारायण तिवारी, शिवजी तिवारी, कारी अशरफूल, कारी शोएब, मौलाना मोहम्मद सज्जाद, हाजी अहमद वगैरह मौजूद थे।

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