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सपा फैमिली ड्रामा पार्ट-2 की तैयारी, अखिलेश को लगातार झटके

फैसल फरीद, लखनऊ: अखिलेश यादव भले ही देश के सबसे बड़े सूबे के मुख्यमंत्री हो लेकिन इधर उनकी समाजवादी पार्टी उनको लगातार झटके दिए जा रही हैं। ऐसे में जब विधानसभा चुनाव सर पर आ गए हो, सपा में अब फैमिली ड्रामा पार्ट-2 के आसार बनते दिख रहे हैं। अभी-अभी सपा के लखनऊ कार्यालय पर कार्यकर्ताओं की भीड़ जुटनी शुरू हो गयी हैं, जब सबको ये पता चला कि अखिलेश ने आखिरकार अपने उम्मीदवारों की सूची मुलायम सिंह को दे दी हैं। प्रदेश अध्यक्ष शिवपाल यादव भी कार्यालय पहुंच गए हैं।

अखिलेश की पसंद को नज़र अंदाज़ करते हुए कल मुलायम सिंह ने मंत्री गायत्री प्रजापति को पार्टी का राष्ट्रीय सचिव बना दिया। गायत्री मंत्रीमंडल से बाहर किए गए थे लेकिन अपनी मुलायम के हस्तक्षेप के बाद वापस मंत्री बन गए। अखिलेश से बिना पूछे हुए कल लोकेश भाटी को छात्र सभा का प्रदेश अध्यक्ष बना दिया गया। गौरतलब है कि ये सारे फैसले कल ही हुए और कल ही अमर सिंह लखनऊ में मुलायम सिंह से मिले थे। अखिलेश चाहे अमर सिंह को बाहरी कहें लेकिन दिखने के लिए चल उसकी ही रही हैं।

फैमिली की लड़ाई एक बार फिर सामने आने वाली हैं। जहां सारी पार्टियां चुनाव प्रचार में व्यस्त हैं, वहीं सपा का प्रचार थम सा गया हैं। दो रैलियां हुई, लेकिन अखिलेश गाजीपुर और बरेली नहीं पहुंचे। उनका रथ भी अब थम गया हैं। शिवपाल धड़ाधड़ टिकट बांट रहे हैं और एक-एक कर के सारे जिला अध्यक्षों को पद से हटा कर दूसरों को बना रहे हैं। वहीं अखिलेश अब पार्टी कार्यालय भी नहीं जा रहे हैं। उनके समर्थकों को पार्टी से बाहर कर दिया गया है।

हालत यहां तक पहुंच गई हैं कि अखिलेश अब जनेश्वर मिश्र ट्रस्ट के कार्यालय में अपने समर्थकों के साथ बैठक करते हैं। कुल मिलकर सपा में समानांतर दो तरफ से चुनाव की तैयारी चल रही हैं। शिवपाल पार्टी कार्यालय से पार्टी के नेताओं के साथ वहीं अखिलेश अपने समर्थको के साथ। सूत्र बताते हैं कि अखिलेश ने जो उम्मीदवारों की सूची दी है उसमें अपना नाम भी डाला है। उनके कितने समर्थकों को टिकट मिलता है ये तो समय ही बताएगा। दूसरी तरप गठबंधन की चर्चाएं भी चल रही हैं।

अखिलेश खुले तौर पर कह चुके हैं कि कांग्रेस से गठबंधन होने पर वो तीन सौ सीटें जीत लेंगे। लेकिन सपा प्रमुख मुलायम ने उसे रिजेक्ट कर दिया हैं। ऐसे में अखिलेश के लिए ये काफी अजीब स्थिति है कि जब उनकी कोई बात पार्टी में नहीं चल रही हैं। हालत ये है कि शिवपाल और अखिलेश अब दोनों आमने-सामने नहीं पड़ रहे हैं। अखिलेश ने खुद कह दिया कि उन्हें राजनीति अपनों ने सिखा दी हैं। सूत्र बता रहे हैं कि अखिलेश ने अपनी तैयारी पूरी कर ली है और कुछ दिनों में वो रथ ले कर निकल जाएंगे। लेकिन जब उम्मीदवार उनकी पसंद के नहीं, चुनाव की रणनीति उनकी नहीं, प्रचार का तरीका उनका नहीं और कब कहां जाना उनके बस में नहीं, तो वो चुनाव में क्या करेंगे ये बात जग जाहिर हैं।

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