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“समान नागरिक संहिता” अल्पसंख्यक समुदाय पर जबरन थोपने से समाजिक तनाव बढ़ेगा- नीतीश कुमार

पटना। समान नागरिक संहिता को लेकर जदयू ने राष्ट्रीय विधि आयोग के चेयरमैन जस्टिस डॉ बीएस चौहान को पत्र लिख कर अपने विचारों से अवगत करा दिया है। पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष सह मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने मंगलवार को पत्र लिखा। उन्होंने विधि आयोग से मांग की है कि समान नागरिक संहिता के पक्ष में मोटे तौर पर आम सहमति हो, न कि इसे जबरन थोपा जाये। देश में अलग-अलग संप्रदायों और जातियों के समूह हैं। इनके अलग-अलग कानूनी प्रावधान हैं, अलग-अलग रीति रिवाज, परंपराएं और सिद्धांत हैं।

इन संप्रदायों से बिना कोई बातचीत के समान नागरिक संहिता लागू करने की कोशिश गलत होगी, खासकर अल्पसंख्यक समूहों पर इसे थोपने की कोशिश से सामाजिक तनाव बढ़ेगा। साथ ही संविधान में धार्मिक स्वतंत्रता की जो गारंटी दी गयी है, उसके प्रति विश्वास कमजोर होगा। जदयू का कहना है कि लोकतंत्र सकारात्मक संवाद के आधारभूत नियमों की बुनियाद पर टिका है। जहां तक समान नागरिक संहिता का सवाल है, तो बगैर संवाद के इस पर पहल सही नहीं है, क्योंकि यह देश बहुसांस्कृतिक और बहुधार्मिक है।

संवाद के दौरान यह भी जरूरी है कि पहले समान नागरिक संहिता पर संसद में और राज्यों के विधानमंडलों में और नागरिक समूहों के बीच विस्तार से बहस और संवाद हो। नीतीश कुमार ने लिखा है कि इस संवेदनशील विषय पर अलग-अलग सांप्रदायों से राय नहीं ली गयी है। लंबे समय से चली आ रही धार्मिक रीति-रिवाज, जो शादी, विवाह, तलाक, उत्तराधिकार, संपत्ति के अधिकार से जुड़े हैं, कई संप्रदायों में आज भी लागू हैं।

इसमें जल्दबाजी में छेड़छाड़ अनुचित है। समान नागरिक संहिता को लागू करने से पहले यह जरूरी होगी कि मुसलिम, ईसाई, पारसी, हिंदू, बौद्ध, सिख और जैन समेत अन्य धर्मों के व्यक्तिगत कानूनों को खत्म किया जाये। इन धर्मों के अनुयायियों या इससे प्रभावित होनेवाले धार्मिक संप्रदायों से विस्तृत परामर्श हो। यह भी जरूरी है कि समान नागरिक संहिता को लेकर केंद्र सरकार की ओर से प्रस्तावित प्रस्ताव का विस्तृत ब्योरा भी पहले ही स्पष्ट कर दी जाये, ताकि इससे प्रभावित होनेवाले सभी संप्रदाय व समूह अपनी राय साफ कर सकें।

नीतीश कुमार ने लिखा है कि समान नागरिक संहिता लोगों के कल्याण के लिए एक सैद्धांतिक प्रयास है, न कि लोगों की इच्छा के विपरीत बगैर उनसे बातचीत किये जल्दबाजी में उन पर थोपने का हथियार, इसलिए आपसी परामर्श, संवाद और बातचीत से आपस सहमति बने।

नीतीश कुमार ने कहा राष्ट्रीय विधि आयोग की ओर से आयी प्रश्नावली में बताया गया कि जवाब देने वाले एक खास बंधन में ही अपनी बात कहें। जवाब देनेवालों के पास सीमित विकल्प हैं। इस तरह उत्तर देनेवालों को पर्याप्त विकल्प नहीं दिया गया है।

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