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समुंद्र में मुहाजिरीन नहीं इन्सानियत डूबी है – उर्दूआन

तुर्क सदर रजब तैयब उर्दूआन ने मुहाजिरीन के मसअले के हवाले से यूरोप के रवैये को तन्क़ीद का निशाना बनाया है। उन्होंने तुर्की के साहिल के क़रीब 12 मुहाजिरीन के डूब कर हलाक होने को इन्सानियत के डूबने से तशबीया दी।

बुध दो सितंबर को तुर्की के साहिल के क़रीब दो कश्तीयां डूबने के नतीजे में 12 मुहाजिरीन हलाक हो गए थे। इन हलाकतों के हवाले से बात करते हुए उर्दूआन का कहना था कि उनकी हलाकत की ज़िम्मेदारी मग़रिबी अक़्वाम पर भी आइद होती है।

हलाक होने वालों में दीगर बच्चों के इलावा तीन साला एलान कुर्दी भी शामिल था, जिसकी लाश जुमेरात की सुबह तुर्की की एक साहिल से मिली थी। दुनिया भर के ज़राए इबलाग़ में छपने वाली इस नन्हे बच्चे की तस्वीर ने आलमी सतह पर मुहाजिरत के मसअले पर बहस को एक नया रुख दे दिया है।

तुर्क सदर रजब तैयब उर्दूआन ने मुतालिबा किया है कि तरक़्क़ी याफ़्ता ममालिक खासतौर पर यूरोप इन्सानी ज़िंदगी और ख़ाबों के हवाले से ज़्यादा हस्सासीयत दिखाए। उर्दूआन के मुताबिक़, ये सिर्फ़ मुहाजिरीन नहीं हैं जो बहीरा रोम में डूबे, ये इन्सानियत डूबी है, इन्सानियत।

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