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सरकारी दवाब के आगे झुकी जेएनयू? उमर खालिद, अनिर्बन JNU से बर्खास्त; कन्हैया को 10,000 का जुर्माना

जेएनयू कैंपस/दिल्ली: साल के फरवरी में हुए जेएनयू मामले को लेकर पिछले काफी वक़्त तक देश की राजनीति गर्माती रही। देश में इस राजनितिक मंथन से ही हमारे बीच आज कन्हैया कुमार के नेता के रूप में उभर कर सामने आया है।

लेकिन इतने सालों से जिस जेएनयू ने कन्हैया और उसके साथियों के विचारों को इस बुलंदी तक पहुँचाया के सामने राजनितिक उलझनें सामने आईं जिनसे पार पाना जेएनयू के लिए मुश्किल साबित हो रहा था।

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देशद्रोह के मामले में जेल में बंद कन्हैया कुमार, उमर खालिद और अनिर्बान भट्टाचार्य के खिलाफ कार्यवाई करने का दवाब जहाँ सरकार की तरफ से जेएनयू पर था वहीँ जेएनयू के कभी कुछ मनुवादी लोग खासतौर पर इन तीनों के खिलाफ कार्यवाई चाहते थे।

शायद इन सभी दवाबों का ही नतीजा है कि आज यूनिवर्सिटी की हाई लेवल इन्क्वारी कमेटी ने ऐसा फैसला सुनाया है। यूनिवर्सिटी के फैसले के मुताबिक उमर खालिद को एक सेमेस्टर के लिए यूनिवर्सिटी कैंपस से बर्खास्त कर दिया गया है जबकि अनिर्बान भट्टाचार्य को जुलाई 15 तक के लिए बर्खास्त किया गया है और उस पर 20000 रूपये का जुर्माना भी लगाया गया है। इसके इलावा अब अनिर्बान अगले पांच साल तक यूनिवर्सिटी से कोई कोर्स नहीं क्र सकेगा।

इसके इलावा जेएनयूएसयू के प्रधान कन्हैया कुमार पर भी 10000 रूपये का जुर्माना लगाया गया है। इन सब के इलावा एक कश्मीरी स्टूडेंट मुजीब गट्टो को भी उस दिन देश विरोधी नारे लगने के आरोप में बर्खास्त किया गया है।

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