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सरकारी मुलाज़मीन की तरक्कियों में तहफ़्फुज़ात नदारद

हैदराबाद 25 जून (सियासत न्यूज़) रियासती हुकूमत ने मुस्लिम अकलीयत के 15 ग्रुप्स को मुलाज़मतों और तालीम के शोबों में तहफ़्फुज़ात फ़राहम किए हैं और इस पर किसी हद तक अमल आवरी भी जारी है। ताहम सरकारी मुलाज़मीन की तरक्कियों में तहफ़्फुज

हैदराबाद 25 जून (सियासत न्यूज़) रियासती हुकूमत ने मुस्लिम अकलीयत के 15 ग्रुप्स को मुलाज़मतों और तालीम के शोबों में तहफ़्फुज़ात फ़राहम किए हैं और इस पर किसी हद तक अमल आवरी भी जारी है। ताहम सरकारी मुलाज़मीन की तरक्कियों में तहफ़्फुज़ात पर अमल आवरी ना होने के सबब मुख़्तलिफ़ ज़ुमरे के सरकारी मुलाज़मीन और ओहदेदारों के साथ नाइंसाफ़ी हो रही है।

रियासती हुकूमत ने तहफ़्फुज़ात की फ़राहमी के वक़्त बैकवर्ड क्लासेस कमीशन की सिफ़ारिशात पर तालीम और रोज़गार में तहफ़्फुज़ात की फ़राहमी का फैसला किया और इसी सिलसिले में क़ानूनसाज़ी भी की गई लेकिन क़ानूनसाज़ी में इस बात की सराहत नहीं की गई कि ये तहफ़्फुज़ात सरकारी मुलाज़मीन की तरक्कियों में भी काबिले अमल होंगे।

वाज़ेह रहे कि दीगर तबक़ात जैसे एस सी , एस टी और बी सी से वाबस्ता मुलाज़मीन और ओहदेदारों को महकमाजाती तरक़्क़ी में भी तहफ़्फुज़ात हासिल हैं जबकि मुस्लिम अकलीयत इस से महरूम है। इब्तिदा में ख़ुद हुकूमत और किसी अक़लीयती तबक़ा के इदारा ने इस जानिब तवज्जा नहीं दी लेकिन अब जबकि तहफ़्फुज़ात पर अमल आवरी को तकरीबन 6 साल मुकम्मल होने को हैं, सरकारी मुलाज़मीन को इस महरूमी का शिद्दत से एहसास हो रहा है।

इस बारे में क़ानून नाफ़िज़ करने वाले सरकारी ओहदेदारों से बात-चीत की गई तो उन्हों ने कहा कि क़ानून में इस तरह की कोई वज़ाहत नहीं है कि मुस्लिम अकलीयत के 15 ग्रुप्स को महकमाजाती तरक्कियों में भी तहफ़्फुज़ात फ़राहम किए जाएं। दिलचस्प बात तो ये है कि तहफ़्फुज़ात पर अमल आवरी को यक़ीनी बनाने के लिए हुकूमत ने जिस वक़्त बैकवर्ड क्लासेस कमीशन से रिपोर्ट हासिल की थी, उस वक़्त भी इस जानिब कोई तवज्जा नहीं दी गई जिस का ख़मियाज़ा आज ओहदेदारों और सरकारी मुलाज़मीन को भुगतना पड़ रहा है।

हुकूमत ने 2005 में आर्डीनेंस के ज़रीए दुबारा तहफ़्फुज़ात फ़राहम करने की कोशिश की ताहम नवंबर 2005 में हाईकोर्ट ने इस आर्डीनेंस को भी कलअदम कर दिया । बाद में हुकूमत ने बी सी कमीशन के ज़रीए मआशी और समाजी तौर पर पसमांदा 15 मुस्लिम ग्रुप्स को 4 फ़ीसद तहफ़्फुज़ात की फ़राहमी से मुताल्लिक़ सिफ़ारिश को बुनियाद बनाकर 4 फ़ीसद तहफ़्फुज़ात फ़राहम किए।

फरवरी 2010 में हाइकोर्ट ने 4 फ़ीसद तहफ़्फुज़ात के ख़िलाफ़ फैसला सुनाया। अब ये मुआमला सुप्रीम कोर्ट में ज़ेरे दौरां है और अदालत ने क़तई फैसला तक तहफ़्फुज़ात पर अमल आवरी को जारी रखने की इजाज़त दी है।

अक़लीयतों से हमदर्दी का इज़हार करने वाली सयासी जमातों और अक़लीयती अवामी नुमाइंदों को इस जानिब तवज्जा मबज़ूल करनी चाहीए ताकि तरक़्क़ी में भी अक़लीयती मुलाज़मीन और ओहदेदारों को तहफ़्फुज़ात फ़राहम हो सके।

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