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सरकार अल्पसंख्यकों की विकास के प्रति प्रतिबद्ध: मुख्तार अब्बास नकवी

NEW DELHI, JAN 17 (UNI):- Union Minister of State for Minority Affairs (I/C) and Parliamentary Affairs Mukhtar Abbas Naqvi addressing at the Annual Conference of State Minorities Commissions at Vigyan Bhawan, in New Delhi Tuesday. UNI PHOTO-47U

नई दिल्ली। देश के विकास के लिए राष्ट्रीय सद्भाव और सांस्कृतिक सद्भावना चाहिए और मोदी सरकार भारत के सभी लोगों की सामाजिक, आर्थिक और शैक्षिक विकास के संकल्प के साथ तेजी से काम कर रही है।

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न्यूज़ नेटवर्क समूह प्रदेश 18 के अनुसार केंद्रीय अल्पसंख्यक मामलों के राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) मुख्तार अब्बास नकवी ने आज यहां राज्य के अल्पसंख्यक आयोगों के वार्षिक सम्मेलन को संबोधित करते हुए यह विचार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार ने सत्ता में आने के बाद सांप्रदायिक दंगों पर पर्याप्त ढंग से काबू पाया है यही कारण है कि वर्ष 2016। 2015 में देश में कोई बड़ा सांप्रदायिक दंगा नहीं हुआ है और जो छिटपुट दंगे हुए हैं वे व्यक्तिगत थे। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि दंगों के छिटपुट घटनाओं के संबंध में आने वाली शिकायतों का अल्पसंख्यक आयोग ने बखूबी निपटारा किया और इससे संबंधित एजेंसियों को अवगत भी कराया।

नकवी ने कहा कि भारत के संविधान में अल्पसंख्यकों को दिए गए अधिकारों को कोई भी पार्टी, सरकार या कोई भी प्रणाली कभी नुकसान नहीं पहुंचा सकता क्योंकि उसकी नींव काफी गहरी और मजबूत हैं। जो लोग राष्ट्रीय सद्भाव को नुकसान पहुंचाने की कोशिश करते हैं ऐसी ताकतों को बेअसर करना चाहिए।

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि कई लोग धार्मिक घृणा फैलाने के लिए अफवाहों का सहारा लेकर माहौल को बिगाड़ने की कोशिश करते हैं। हाल के दिनों में हरियाणा के मेवात में इसी तरह की अफवाहें फैलाकर सांप्रदायिक सद्भाव को बिगाड़ने की कोशिश की गई लेकिन उन्होंने इन क्षेत्रों में छह प्रगति पंचायत करके न केवल इस तरह की अफवाहों पर रोक लगाने में सफलता हासिल की बल्कि मेवात के क्षेत्रों में शैक्षिक और विकास के योजनाओं की घोषणा करके वहां की जनता में विश्वास पैदा किया।

नकवी ने कहा कि उनके मंत्रालय ने देश में विश्व स्तरीय पांच विश्वविद्यालयों की स्थापना करने का हाल ही में घोषणा की है जिनमें 40 प्रतिशत सीटें छात्राओं के लिए आरक्षित होंगी। उन्होंने कहा कि इन विश्वविद्यालयों की स्थापना के लिए राजस्थान, महाराष्ट्र और कर्नाटक की सरकारों ने जमीन देने की पेशकश की है। उन्होंने कहा कि इन विश्वविद्यालयों की स्थापना के लिए कार्रवाई शुरू कर दी गई है और 2018 के शैक्षणिक सत्र में पढ़ाई की प्रक्रिया शुरू कर दिया जाएगा।

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