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सरहद पार से फायरिंग का सिलसिला जारी

नई दिल्ली: हुकूमत ने आज लोक सभा में बताया है कि पाकिस्तान ने जारिया साल 26 जुलाई तक जम्मू-कश्मीर में बैनुल-अक़वामी सरहद पर 192 मर्तबा जंग बंदी की ख़िलाफ़वरज़ी की है और इस तरह की इश्तिआल अंगेज़ी पर फ़ील-फ़ौर इक़दामात करते हुए मूसिर जवाब दिया गया।

इवान को ये भी मतला किया गया कि सरहद पार की फायरिंग में हलाक होने वालों के ख़ानदानों को मर्कज़ की जानिब से 5 लाख रुपये मुआवज़ा अदा करने की तजवीज़ है जो कि रियासती हुकूमत के मुआवज़े के क़त-ए-नज़र होगा। मुमलिकती वज़ीरे दाख़िला हरी भाई प्रति भाई ने एक तहरीरी जवाब में बताया कि 26 जुलाई2015 तक जम्मू-कश्मीर में बैनुल-अक़वामी सरहदों पर जंग बंदी की ख़िलाफ़वरज़ी के 192 वाक़ियात पेश आते हैं जिस में 3 शहरी और एक बी एस एफ जवान हलाक हो गए और 22 अफ़राद ज़ख़मी हो गए जब कि 7,110 अफ़राद आरिज़ी तौर पर मुतास्सिर और 30 मकानात को नुक़्सान पहुंचा।

उन्होंने बताया कि गुज़िशता साल जंग बंदी की ख़िलाफ़वरज़ी के 430 वाक़ियात में 14 अफ़राद बिशमोल 12 शहरी और 2 बी एस एफ अहलकार हलाक हो गए जब कि 2.08 लाख अफ़राद मुतास्सिर हो गए। मर्कज़ी वज़ीर ने कहा कि जंग बंदी की ख़िलाफ़वरज़ी की रोक-थाम और अवाम के तहफ़्फ़ुज़ को यक़ीनी बनाने के लिये हुकूमत ने मुख़्तलिफ़ इक़दामात बिशमोल बी एस एफ की जानिब से फ़ील-फ़ौर जवाबी कार्रवाई की जा रही है।

उन्होंने कहा कि सिफ़ारती सतह पर हिन्दुस्तान ये इसरार कर रहा है कि पाकिस्तान लाईन आफ़ कंट्रोल का एहतेराम और साल 2003 के इक़रारनामा की पाबंदी करे।

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