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सलामती कौंसल की तौसीअ केलिए हिंदूस्तान का ज़ोर हफ़्ता को वज़ीर-ए-आज़म मनमोहन सिंह का जनरल असैंबली से ख़िताब

नई दिल्ली । 22 ।( ज़हीरउद्दीन अली ख़ान ) सितंबर । अक़वाम-ए-मुत्तहिदा मे इस्लाहात को वक़्त का तक़ाज़ा क़रार देते हुए वज़ीर-ए-आज़म मनमोहन सिंह ने आज ज़ोर दे कर कहा कि सलामती कौंसल की तौसीअ के साथ इस आलमी इदारा म कई आजलाना तौर पर इस्लाहात लाए जाएं। इस इदारा को ग़ैर जांनिबदार बा एतबार और मूसिर आलमी इदारा की हैसियत से ख़िदमत अंजाम देनी होगी । वज़ीर-ए-आज़म मनमोहन सिंह न्यूयार्क में अक़वाम-ए-मुत्तहिदा जनरल असैंबली के 66 वें सैशन में शिरकत के लिए अमरीका रवाना हुए हैं। फ़्रैंकफ़र्ट में आमद के बाद वो न्यूयार्क पहूंचेंगी। मनमोहन सिंह ने कहा कि हिंदूस्तान आलमी सतह पर अमन के क़ियाम को फ़रोग़ देने की कोशिशों में शामिल है । सलामती और अमन दो ऐसे अंसर हैं जिस पर हिंदूस्तान पूरी तवज्जा दे रहा है । सलामती कौंसल का आप ग़ैर मुस्तक़िल रुकन बन जाने के बाद इस ने पालिसी साज़ इदारा की असर पज़ीरी को मज़ीद तक़वियत दी है। उन्हों ने कहा कि अक़वाम-ए-मुत्तहिदा को एक ग़ैर जांनिबदार , बा एतिबार और मूसिर इदारा के तौर पर देखा जाना चाहिये। मैं इस ज़रूरत की जानिब ज़ोर देता हूँ कि इस मुनफ़रद तंज़ीम में जल्द अज़ जल्द इस्लाहात लाए जाएं, ख़ासकर उस की सलामती कौंसल की तौसीअ के फ़ौरी इक़दामात किए जाएं। हिंदूस्तान सलामती कौंसल में एक मुस्तक़िल नशिस्त का बरसों से मुतमन्नी है । इस साल जनवरी में हिंदूस्तान 19 साल के वक़फ़ा के बाद इस इदारा का एक ग़ैर मुस्तक़िल रुकन बन गया है । वज़ीर-ए-आज़म मनमोहन सिंह ने कहा कि आलमी अमन और सलामती को फ़रॶग़ देने हमारी कोशिशें और तरक़्क़ी पज़ीर मलिक के मक़ासिद को पूरा करने की जद्द-ओ-जहद जारी है । मेरा ईक़ान है कि इस इदारा की ज़िम्मेदारीयों में इज़ाफ़ा करदिया जाय और इस की असर पज़ीरी को भी मज़बूत बनाया जाई। इस बात की निशानदेही करते हुए कि इस साल अक़वाम-ए-मुत्तहिदा जनरल असैंबली का इजलास एक ऐसे वक़्त मुनाक़िद होरहा है जब सारी दुनिया को हमा रुख़ी चैलेंजस का सामना है । वज़ीर-ए-आज़म ने कहा कि इस से क़बल ही तमाम मुल्कों की ये ज़िम्मेदारी है कि वो इन चैलेंजस से निमटने के लिए ठोस क़दम उठाएं। अक़वाम-ए-मुत्तहिदा के लिए अब वक़्त आगया है कि वो अपने आलमी क़ाइदाना रोल को अंजाम दे । चैलेंजस का तज़किरा करते हुए वज़ीर-ए-आज़म ने कहा कि आलमी कसादबाज़ारी के दरमयान आलमी मईशत लड़खड़ाने लगी है इस लिए मईशत को बेहतर बनाने तमाम मसाइल पर तवज्जा देनी होगी, ख़ासकर इफरात-ए-ज़र पर क़ाबू पाने के इक़दामात के बिशमोल हर मसला को बारीकबीनी से देखना होगा । दहश्तगर्दी और ग़ैर रिवायती ख़तरात , आलमी सलामती को लाहक़ होगए हैं जैसा कि क़ज़्ज़ाक़ी ने अक़्वाम को ख़तरात से दो-चार करदिया है और इस से आलमी सियासत-ओ-मुआशरा का ताना बाना बिखर गया है । उन्हों ने ये भी कहा कि मग़रिबी एशीया , शुमाली अफ़्रीक़ा और ख़लीजी ख़तों में बड़ी खामियां पाई जाती है और दुनिया के इस अहम दौर में हर एक को अपनी ज़िम्मेदारी नेक नीयती से पूरी करनी होगी । फ़लस्तीन का सवाल भी हल तलब है । मनमोहन सिंह ने न्यूयार्क में ईरान , जुनूबी सूडान और श्रीलंका के सदूर और जापान और नेपाल के वुज़राए आज़म से बाहमी मुलाक़ात के लिए उम्मीद का इज़हार किया है । मनमोहन सिंह के हमराह वज़ीर-ए-ख़ारजा ऐस ऐम कृष्णा , क़ौमी सलामती मुशीर शिव शंकर मेनन और मोतमिद ख़ारिजा रंजन मथाई भी हैं। हफ़्ता के दिन जनरल असैंबली के आला सतही इजलास से वज़ीर-ए-आज़म का ख़िताब होगा।

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