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सलामती कौंसल मौजूदा हालात से हम आहंग नहीं : हिंदूस्तान

अक़वाम-ए-मुत्तहिदा २५ नवंबर ( पी टी आई ) हिंदूस्तान ने कहा कि अक़वाम-ए-मुत्तहिदा सलामती कौंसल मौजूदा हालात और हक़ायक़ से हम आहंग नहीं और ये आलमी अमन-ओ-सलामती के साथ साथ लड़ाई की रोक थाम के मुआमले में एक संगीन चैलेंज है ।

अक़वाम-ए-मुत्तहिदा २५ नवंबर ( पी टी आई ) हिंदूस्तान ने कहा कि अक़वाम-ए-मुत्तहिदा सलामती कौंसल मौजूदा हालात और हक़ायक़ से हम आहंग नहीं और ये आलमी अमन-ओ-सलामती के साथ साथ लड़ाई की रोक थाम के मुआमले में एक संगीन चैलेंज है ।

अक़वाम-ए-मुत्तहिदा सलामती कौंसल में बैन-उल-अक़वामी अमन-ओ-सलामती को दरपेश नए चैलेंजस पर ख़िताब करते हुए हिंदूस्तानी सफ़ीर ने कहा कि कौंसल की सब से अहम ज़िम्मेदारी ये है कि बैन-उल-अक़वामी अमन-ओ-सलामती को लाहक़ उमोर और फ़ौरी ख़तरात से निमटा जायॆ ।

हमारा ये नुक़्ता-ए-नज़र है कि बैन-उल-अक़वामी अमन-ओ-सलामती और लड़ाई की रोक थाम केलिए आलमी हुक्मरानी का एक प्लेटफार्म होना चाहीए उसे सलामती कौंसल का नाम दिया गया है लेकिन मौजूदा हालात से ये हम आहंग नहीं। उन्हों ने बताया कि 1945 -ए-में जो हालात थे वो आज मुकम्मल तबदील होगए हैं।

इसी तरह अक़वाम-ए-मुत्तहिदा रुकन ममालिक की सलाहीयतें भी बदल चुकी हैं चुनांचे माज़ी के तरीका-ए-कार को जारी रखने के बजाय सलामती कौंसल को नई पेशरफ़त करनी चाहीए और इजतिमाई इक़दामात के ज़रीया ताज़ा सूरत-ए-हाल से निमटने की कोशिश करनी चाहीए ।

उन्हों ने कहा कि ये काम तमाम ममालिक को साथ लेकर इजतिमाई तौर पर करने की ज़रूरत है । आज की दुनिया एक दूसरे से बाहम मरबूत है और साईंसी शोबे में तबदीलीयों के साथ साथ मुवासलाती शोबे में इन्क़िलाब के इलावा जंगी तकनीक वो ग्लोबलाइज़ेशन में भी तबदीली आई है ।

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