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सहारा समूह पुणे में स्थित ३९००० करोड़ की “एमबी वैली” से चुकाए अपना ऋण : सर्वोच्च न्यायलय

सर्वोच्च न्यायालय ने आज सहारा समूह की पुणे में स्थित ३९००० करोड़ रुपई की “एमबी वैली” को जप्त करने का आदेश दे दिया। न्यायलय ने कहा की सहारा समूह लोगो का पैसा अपनी इस सम्पति को बेच कर दे ।

सहारा समूह के प्रमुख सुब्रोतो रॉय की अंतरिम जमानत को मंज़ूरी देते हुए सर्वोच्च न्यायालय ने कहा की सहारा समूह २ हफ्ते के अंदर अपनी ऐसी सम्पति की सूचि दे जी ऋण मुक्त है और जिसका नीलामी के लिए इस्तेमाल किया जा सके ताकि ऋण के मूलधन (14000 करोड़ रुपये) का भुगतान किया जा सके ।

पिछले साल नवम्बर में सर्वोच्च न्यायालय ने रॉय की पैरोल को जारी रखते हुए समूह से कहा की वो 6 फरवरी तक 600 करोड़ रुपये का भुकतान करे। गौरतलब है की सहारा समूह ने ऋण का भुकतान करने की पुरे 2.5 साल के वक्त की रोजना न्यायलय मे
जमा कराई थी।

न्यायलय ने समूह से पूछा की वो अपनी योजना मे बदलाव क्यों नहीं करती और हर महीने 1000 करोड़ का भुगतान क्यों नहीं करती । इस तरीके से वे 2 सालो में 3 करोड़ निवेशकों के 24000 करोड़ रुपये लौट सकेगी ।

सहारा समूह की दो कंपनियों – सहारा इंडिया रियल एस्टेट कारपोरेशन लिमिटेड (इसऑयआरइसीएल ) और सहारा हाउसिंग इन्वेस्टमेंट कारपोरेशन लिमिटेड (इसएचऑयसीएल ) ने 2008 और 2009  में वैकल्पिक रूप से पूरी तरह परिवर्तनीय डिबेंचर के माध्यम से 3.3 करोड़ निवेशकों से पैसा उठाया था ।

सर्वोच्च न्यायलय ने अगस्त 31 ,2012 में  इसऑयआरइसीएल और इसएचऑयसीएल को निवेशकों के 17600 करोड़ रुपये का 15 % ब्याज के साथ वापिस करने का आदेश दिया था ।

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