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सांसदों- विधायकों पर SC की टिप्पणी, कहा- जनप्रतिनिधि होते हुए दूसरा कारोबार कैसे कर सकते हैं

सुप्रीम कोर्ट ने कुछ सांसदों और विधायकों की संपत्ति में 500 गुना तक की बढ़ोतरी पर सवाल उठाया कि अगर सांसद और विधायक ये बता भी दें कि उनकी आय में इतनी तेजी से बढ़ोतरी बिज़नेस से हुई है, तो सवाल उठता है कि सांसद और विधायक होते हुए कोई बिज़नेस कैसे कर सकते हैं?

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अब वक्त आ गया है ये सोचने का कि भ्रष्ट नेताओं के खिलाफ कैसे जांच हो और तेजी से फास्ट ट्रैक कोर्ट में सुनवाई हो.

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से पूछा कि आज से सालों पहले एनएन वोरा की रिपोर्ट आई थी, आपने उस पर क्या काम किया? समस्या आज जस की तस है. आपने रिपार्ट को लेकर कुछ नहीं किया.

सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि जनता को पता होना चाहिए कि नेताओं की आय क्या है, इसे क्यों छिपाकर रखा जाए. अब सुप्रीम कोर्ट तय करेगा कि नामांकन के वक्त प्रत्याशी अपनी और अपने परिवार की आय के स्रोत का खुलासा करे या नहीं.

‘लोक प्रहरी’ एनजीओ की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया है. मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने CBDT के उस सील बंद लिफाफे को खोला, जिसमें सात लोकसभा सांसदों और 98 विधायकों द्वारा चुनावी हलफनामे में संपत्तियों के बारे में दी गई जानकारी इनकम टैक्स रिटर्न में दी गई जानकारी से अलग है.

सरकार की ओर से अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने बताया कि इन सभी के खिलाफ जांच चल रही है और फास्ट ट्रैक कोर्ट में केस को प्राथमिकता के आधार पर भेजा जाता है. जानकारी देखने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने नामों को सार्वजनिक नहीं किया, बल्कि कोर्ट स्टॉफ को कहा कि वापस इसे सीलबंद कर दें.

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