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साइकिल जब्त हुई तो मुलायम ‘खेत जोतता किसान’ पर लड़ सकते है चुनाव

फैसल फरीद, लखनऊ: समाजवादी पार्टी का झगड़ा निपटता नहीं दिख रहा हैं। मुलायम सिंह और अखिलेश यादव के बीच बात हो रही हैं लेकिन कोई निष्कर्ष नहीं निकल रहा हैं। इस सबके बीच दोनों खेमों ने अलग-अलग चुनाव लड़ने की तैयारी भी शुरू कर दी हैं। ऐसे में बात आती है चुनाव निशान की। सपा को साइकिल चुनाव चिन्ह आवंटित है। लेकिन दोनों गुट ने इस पर अपना दावा ठोक दिया है। मामला अब चुनाव आयोग के पाले में हैं और 13 जनवरी को सुनवाई होनी है।

इसी बीच सूत्रों की माने तो दोनों गुट अलग-अलग चुनाव चिन्ह पर लड़ने की तैयारी भी कर रहे है। मुलायम खेमा जहां लोक दल के चुनाव निशान ‘खेत जोतता किसान’ पर लड़ने के लिए प्रयासरत हैं वहीं अखिलेश खेमा ‘बरगद का पेड़’ चुनाव चिन्ह पर लड़ सकते है। ये हालत तब होगी जब साइकिल दोनों के पास से चली जाए और नया चुनाव निशान लेने की नौबत आए।

इस बात को मजबूती इस वजह से मिली क्योंकि मुलायम सिंह ने सुनील सिंह जो इस समय लोक दल के अध्यक्ष हैं उनसे बात की है। खेत जोतता किसान चुनाव निशान उनके पास है। लोक दल से मुलायम का पुराना संबंध भी है। सन् 1982 में, मुलायम लोक दल के प्रदेश अध्यक्ष भी थे और 1985 के चुनाव में 85 सीटें जीत कर नेता विपक्ष भी बने थे। वैसे भी मुलायम अपने आप को मुलायम का असली वारिस बताते हैं। लोक दल चौधरी चरण सिंह की पार्टी रही हैं।

दूसरी ओर अखिलेश खेमा समाजवादी जनता पार्टी के चुनाव चिन्ह बरगद का पेड़ पर चुनाव लड़ सकता हैं। ये निशान इस समय सजपा के पास है जिसके अध्यक्ष कमल मोरारका हैं। सजपा पहले चंद्रशेखर की पार्टी रही हैं और मुलायम सपा बनाने से पहले इसी में थे और एक विधान सभा का चुनाव भी लड़े हैं। इस मामले में अखिलेश गुट कमल मोरारका के संपर्क में बताया जा रहा हैं। दोनों स्थितियां तब की है जब झगड़ा सलट नहीं पाए और अलग-अलग चुनाव लड़ने की नौबत आ जाए।

मामला अब सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष के पद पर फंसा बताया जा रहा हैं, मुलायम अखिलेश को सब अधिकार देने को तैयार हैं। लेकिन राष्ट्रीय अध्यक्ष पद वापस चाहते हैं। वहीं अखिलेश इसके लिए तैयार नहीं हैं। हालात भी अब समझौते के नहीं दिख रहे है। मौजूद समय में अखिलेश ज्यादा ताकतवर दिखाई दे रहे है और मुलायम के पास समझौता नहीं बल्कि आत्मसमर्पण का रास्ता ज्यादा दीख रहा है।

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