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साइट पर इंदिरा की मुखालफत मुद्दे पर सियासत गरमाई

पटना : सरकारी साइट पर इमरजेंसी की मुखालफत पर कांग्रेस के ऐतराज से सियासत गर्म हो गई है। कांग्रेस अज़ीम इत्तिहाद का हिस्सा है। उसने एतराज़ दर्ज की और उसे रियासती हुकूमत के साइट से हटा लिया गया। पर ओपोजिशन ने इसे मुद्दा बना लिया है।

हालांकि रियासती सदर और हुकूमत के वजीर डॉ. अशोक चौधरी ने बिहार सरकार की वेबसाइट पर इंदिरा गांधी और इमरजेंसी के खिलाफ किसी भी बात के होने से इनकार किया। कहा कि यह मुखालिफत की साजिश है। अज़ीम इत्तिहाद में दरार डालने की कोशिश की जा रही है।

नीतीश कुमार और लालू प्रसाद यादव कांग्रेस की ज़ज्बात का पूरा इज्ज़त करते हैं। उधर डॉ. चौधरी ने सरकार की साइट चेक कराकर दिल्ली कांग्रेस हेड क्वार्टर को भी उस पर किसी एतराज़ की बात के नहीं होने की रिपोर्ट की।

उधर साबिक नायब वज़ीरे आला सुशील कुमार मोदी ने कहा है कि बिहार सरकार की वेबसाइट पर कहा गया है कि अंग्रेजों ने महात्मा गांधी के साथ वैसा बर्ताव नहीं किया, जैसा कांग्रेस ने इमरजेंसी के दौरान जेपी के साथ किया। यह एक तारीखी हकीक़त है, लेकिन कांग्रेस के दबाव में सरकार ने इसे फ़ौरन वेबसाइट से हटा लिया। इलज़ाम लगाया कि वज़ीरे आला नीतीश कुमार की सरकार कभी लालू प्रसाद तो कभी कांग्रेस के दबाव में फैसले ले रही है।

मिस्टर मोदी ने कहा कि नीतीश कुमार बताएं कि क्या यह सच नहीं है कि मौजूदा वज़ीरे आज़म इंदिरा गांधी ने जेपी को जेल में डालकर ऐसी तशद्दुद दी कि उससे मिली बीमारी से उनकी मौत की वजह बनी। क्या कांग्रेस जेपी की मौत के लिए जिम्मेवार नहीं है। अज़ीम इत्तिहाद सरकार तारीख बदलना चाहती है। सवाल यह भी है कि क्या कांग्रेस के दबाव में जेपी सेनानियों को मिलने वाली बिहार सरकार की मानद पेंशन भी बंद कर दी जाएगी।

 

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