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मुस्लिम बैन: मुसलमानों के साथ खड़ा हुआ जापानी अमेरीकी समुदाय

अमेरिका में राष्ट्रपति ट्रम्प की भेदभावपूर्ण मुस्लिम प्रतिबन्ध की नीति के खिलाफ आन्दोलन में जापानी और मुस्लिम अमरीकी एक साथ आ रहे हैं। यह आने वाले वक्त के लिए एक अच्छा बदलाव है।

जापानी अमरीकी समुदाय इस साल वर्षगांठों की एक श्रृंखला मना रहा है: 75 साल पहले, 14 जनवरी को अमेरिका के तत्कालीन राष्ट्रपति फ्रैंकलिन डी रूजवेल्ट, जिसे मौजूदा राष्ट्रपति ट्रम्प बेहद पसंद करते हैं, ने एक घोषणा कर जापानी, जर्मन और इतालियन समुदाय के लोगों को न्याय विभाग के साथ पंजीकरण के लिए मजबूर किया था। फरवरी 19 द्वित्तीय विश्व युद्ध के दौरान अमेरिका द्वारा अपने जापानी समुदाय की नज़रबंदी करने की 75वी वर्षगाँठ है। इस सारे इतिहास को तारीखों के साथ लॉस एंजिल्स में छोटे टोक्यो में संजो कर रखा गया है।

लॉस एंजिल्स में मौजूद इस जापानी अमरीकी राष्ट्रिय संग्रहालय में द्वित्तीय विश्व युद्ध से जुड़ी कई महत्वपूर्ण चीज़ों को संभाल कर रखा गया है। इसमें एक बैरक भी है जिसे पश्चिमी व्योमिंग राज्य के हार्ट माउंटेन कैंप से लाकर रखा गया है, जहाँ युद्ध में इंटर्नशिप करने वाले जापानियों को रखा गया था।

लॉस एंजिल्स में ‘लिटिल टोक्यो में, द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान जो हुआ उसे बेहद देखभाल के साथ बनाए रखा है ताकि लोगों को याद रहे कि उस वक़्त क्या हुआ था।

यहाँ पर कई लोगों का मानना है कि स्मृति में एक राजनीतिक शक्ति होती है, और यही शक्ति इतिहास में हुयी घटनाओं को दुबारा होने से रोक सकती है। अमरीकी जापानी समुदाय और अमरीकी मुस्लिम समुदाय का साथ आना भी इस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

अमरीकी जापानी समुदाय ट्रम्प के राष्ट्रपति चुनाव प्रचार के वक़्त से ही ट्रम्प के मुस्लिम रजिस्ट्री प्रस्ताव पर अपना विरोध प्रदर्शित करता रहा है और उन्होंने मुसलमानों के साथ मिल कर “विजिलेंट लव” नाम से एक मुहीम भी शुरू की थी। सात मुस्लिम देशों के आप्रवासियों पर प्रतिबन्ध के बाद इस मुहीम ने एक बड़ा प्रदर्शन भी किया था।

“जब हमारे समुदाय के साथ ऐसा हुआ तब कई लोग थे जो हमारे साथ खड़े हुए थे, अब यह हमारी ज़िम्मेदारी है कि हम दूसरों के लिए खड़े हों,” लिटल टोक्यो कम्युनिटी कौंसिल के 29 वर्षीय मैनेजिंग डायरेक्टर क्रिस्टिन फुकुशीमा ने कहा। फुकुशीमा के दादा-दादी को भी द्वित्तीय विश्व युद्ध के दौरान नज़रबंद किया गया था।

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