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साम्प्रदायिक अशांति फैलाने के आरोप में युवाओं ने जलाई दैनिक जागरण की प्रतियां

साभार: नेशनल दस्तक

भागलपुर। बिहार के भागलपुर शहर के हबीबपुर मोहल्ले में मुस्लिम युवाओं ने एकत्रित हो कर दैनिक जागरण अख़बार की प्रतियों को जला कर अख़बार के प्रति अपना गुस्सा दिखाया। मुस्लिम युवाओं ने अखबार पर मुसलमानों के बारे में उलटी सीधी खबरे छापने का आरोप लगाया और अख़बार की कई प्रतियों को जला कर गुस्सा दिखाते हुए कार्यवाही की मांग की।

इस आक्रोश का नेतृत्व पेशे से अधिवक्ता मोहम्मद आरज़ू के द्वारा किया गया। मोहम्मद आरज़ू का कहना है की अख़बार ने बिना किसी जांच पड़ताल के हमारे मोहल्ले की झूठी खबर प्रकाशित की थी की मोहल्ले के मुसलमानों ने कुछ साल पहले पाकिस्तान का झंडा फहराने की कोशिश की थी।

आरज़ू ने आगे बताया की भगवा संगठन एवम् कुछ भूमाफियाओं ने इलाके में साम्प्रदायिक तनाव बढ़ाने की कोशिश की थी। और इन्ही लोगो द्वारा अखबार में इस तरह की खबरें मुसलमानों को बदनाम करने के लिए चलवाई जा रही हैं और अखबार बिना किसी छानबीन एवम् पुलिस प्रशासन से बिना किसी जानकारी के आधार पर ऐसी खबरें प्रकाशित भी कर रहा है।

उन्होंने आगे बताया की हमारे मोहल्ले में बरसो से हिन्दू मुस्लिम एक साथ शांतिपूर्वक रह रहे हैं। लेकिन पिछले कुछ समय से यहाँ साम्प्रदायिक शक्तियो द्वारा नफरत फैलाने का काम किया जा रहा है।

भगवा संगठन बरसो से भारत के मुसलमानों को।पाकिस्तानपरस्त बता कर उनपर देशद्रोह का आरोप लगाता आया है और अब यह अखबार भी यही काम कर रहा है। पिछले दिनों इसी मोहल्ले के पास स्थित एक विवादित सरकारी तालाब के किनारे स्थित मूर्ति को लेकर पुलिस-प्रशासन और हिंदुओं के बीच तीखी झड़प हो गई थी।

प्रशासन द्वारा मूर्ति को हटाया जा रहा था, जिसका हिंदुओं ने जमकर विरोध किया था। ब्भीद को नियंत्रित करने के लिए पुलिस को लाठीचार्ज और कई राउंड हवाई फायर करना पड़ा था। घटना के बाद से ही विहिप, बजरंग दल आदि संगठन इसे सांप्रदायिक रंग देने की कोशिश कर रहे हैं। इसी क्रम में दैनिक जागरण द्वारा इस किस्म की खबर प्रकाशित करने को उसी कड़ी से जोड़कर देखा जा रहा है।

भागलपुर सांप्रदायिक दृष्टि से काफी संवेदनशील माना जाने वाला क्षेत्र है। 1989 में रामशिला पूजन यात्रा के दौरान यहां भीषण सांप्रदायिक हिंसा की घटना हुई थी, जिसमें डेढ़ हजार से ज्यादा मुसलमान और कुछ हिन्दू भी मारे गए थे। उस वक्त भी स्थानीय अखबारों ने अफवाह फैलाने और दंगे की आग में घी डालने में अहम भूमिका अदा की थी।

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