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सारे मुल्क में अज़ान फ़ज्र पर पाबंदी आइद करने फ़िर्कापरस्त तंज़ीमों का मांग‌

हिंदुस्तान में फ़िर्कापरस्त ताक़तें किसी ना किसी तरह मुसलमानों को हिरासाँ-ओ-परेशान करने में मसरूफ़ हैं। कभी उर्दू के नाम पर तो कभी मसाजिद-ओ-मदारिस के नाम पर और कभी हिंदू लड़कियों के साथ मुस्लिम लड़कों के मुआशरा के नाम पर मुसलमानों को

हिंदुस्तान में फ़िर्कापरस्त ताक़तें किसी ना किसी तरह मुसलमानों को हिरासाँ-ओ-परेशान करने में मसरूफ़ हैं। कभी उर्दू के नाम पर तो कभी मसाजिद-ओ-मदारिस के नाम पर और कभी हिंदू लड़कियों के साथ मुस्लिम लड़कों के मुआशरा के नाम पर मुसलमानों को परेशान किया जाता है।

हद तो ये है कि अब तो मसाजिद की मीनारों से फ़िज़ा में गूंजने वाली अजानों पर पाबंदी आइद करने का मांग‌ किया जाने लगा। कर्नाटक के इलाक़ा मंगलोर में एक ग़ैरमारूफ़ हिंदू तंज़ीम ने ऐसा मांग‌ किया है जिससे सारे मुल्क में हंगामा खड़ा होसकता है। राष्ट्रीय हिंदू अंदोल‌न के बयानर तले काम करनेवाली हिंदू जना गुरवती ने मुसलमानों की मुख़ालिफ़त में आगे आते हुए मुल्क की तमाम मस्जिद में अज़ान फ़ज्र पर पाबंदी आइद करने की मांग की है।

कर्नाटक के एक न्यूज़ पोर्टील कोस्टिल डाइजिस्ट में शाय करदा रिपोर्ट में बताया गया है कि इतवार की सुबह दर्जनों हिंदू शिद्दत पसंदों के साथ‌ कुछ अर्सा पहले ख़ुदकशी की कोशिश करने वाले स्वामी ने मंगलोर में दफ़्तर डिप्टी कमिशनर पुलिस मंगलोर के सामने एहतिजाज मुनज़्ज़म किया।

एहितजाजियों की मांग थी कि अज़ान फ़ज्र पर पाबंदी आइद की जाये। राष्ट्रीय हिंदू आंदोल‌न के बयानर तले ये एहतिजाज ऐसे वक़्त किया गया जबकि चंद घंटों बाद ही मोदी की हल्फ़ बर्दारी होने वाली थी। एहितजाजी धरने से ख़िताब करते हुए सनातन संथा की सरगर्म कारकुन वजया लक्ष्मी ने कहा कि अगरचे हिंदुस्तान ने तमाम शहरियों को मज़हबी आज़ादी दी है इसे में किसी एक मज़हब के मानने वालों को इस आज़ादी का बेजा इस्तिमाल नहीं करना चाहिए।

उन्होंने इल्ज़ाम आइद किया कि एक मख़सूस मज़हब के लोग दूसरे मज़ाहिब के मानने वालों के सुकून में ख़लल पैदा कररहे हैं। कोस्टिल डाइजिस्ट काम के मुताबिक़ वजय लक्ष्मी ने अज़ान के बारे में गलत‌ लफ़्ज़ इस्तिमाल करते हुए कहा कि मुसलमानों को ये जान लेना चाहिए कि जब वो अज़ान फ़ज्र देते हैं तो इससे समाज के अक्सर लोगों की नींद में ख़लल होता है।

हिंदू जन जागुरवती समीती के सरगर्म कारकुन विदेक पाई ने अपने ख़िताब में कहा कि सुकून के साथ सोने (महव ख़ाब) होने का हक़ भी हिंदुस्तानी शहरी के बुनियादी हुक़ूक़ के दायरा में आता है। इस फ़िर्कापरस्त ने ये भी कहा कि रात 10 बजेता सुबह 6 बजे लाडिस्पीकर्स के इस्तिमाल की इजाज़त नहीं दी जानी चाहिए क्योंकि सुप्रीम कोर्ट ने भी इन औक़ात में मूसीक़ी और दीगर शोरशराबा पर पाबंदी आइद कर रखी है।

यहां इस बात का तज़किरा ज़रूरी होगा कि सुप्रीम कोर्ट के इन अहकामात का अज़ान पर इतलाक़ नहीं होता। इन फ़िर्क़ा परस्तों को अंदाज़ा होना चाहिए कि अज़ान के लिए एक वक़्त मुक़र्रर होता है। इससे चंद मिनट पहले और बाद में अज़ान नहीं दी जाती। अज़ान जहां इस्लाम में से एक है वहीं ये डिसिप्लिन की एक अलामत है लेकिन किसी ना किसी तरह अपने ज़हर उगलने की आदत से बाज़ ना आते हुए विवेक पाई जैसे लोगों का ये भी कहना है कि बाज़ मुक़ामात पर मुसलमान सुबह के औक़ात में लाडिस्पीकर्स का इस्तिमाल करते हुए सोती आलूदगी का बाइस बिन रहे हैं।

विवेक पाई ने इस बात का भी मांग‌ किया है कि 6 बजे सुबह से क़बल अज़ान के लिए जो लोग लाडिस्पीकर्स इस्तिमाल करते हैं उन्हें गिरफ़्तार करके सज़ाएं दी जानी चाहिए। राष्ट्रीय हिंदू आंदोन के रुक्न रमेश नायक का दावा है कि कई मसाजिद, स्कूलों, कॉलेजों, हॉस्टलों और हॉस्पिटलों के क़रीब वाके हैं।

मस्जिदों और अज़ान के इस दुश्मनी के ख़्याल में इस तरह की मसाजिद तलबा और मरीज़ों के लिए मुश्किलात का बाइस बनें। भारत क्रांति सेना के सरबराह पराना वनंदा स्वामी जिन्होंने बैंगलोर में एक ईसाई के टी वी प्रोग्राम पर पाबंदी आइद करने का मांग‌ करते हुए ख़ुदकुशी की कोशिश की थी, कहा कि अज़ान फ़ज्र के ख़िलाफ़ एहितजाजी मुज़ाहिरों का सिलसिला उस वक़्त तक जारी रहेगा जब तक सारे मुल्क में अज़ान पर पाबंदी आइद नहीं की जाती।

इस रिपोर्ट पर कई लोगों ने तबसरा किया। इनका कहना था कि ये हिंदुस्तान में फ़िर्कावाराना हम आहंगी को नुक़्सान पहुंचाने वाले मायूस अनासिर की बकवास के सिवा-ए-कुछ नहीं। बाज़ ग़ैर मुस्लिमों के ख़्याल में मुसलमान वक़्त पर अज़ान देते हैं और ये घंटों जाए नहीं रहती बल्कि ज़्यादा से ज़्यादा 5 मिनट तक इस का सिलसिला जारी रहता है और हिंदुस्तान की फ़िज़ा में सदियों से अजानें गूंज रही हैं।

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