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साहिर लुधियानवी अवाम के दिलों में ज़िंदा : प्रणब मुखर्जी

नई दिल्ली 8 मार्च (पी टी आई) मशहूर शायर-ओ-गीतकार साहिर लुधियानवी को आज उनके यौम पैदाइश के मौक़े पर ख़राज पेश किया गया और सदर जम्हूरिया प्रणब मुखर्जी ने उनकी याद में एक यादगार डाक टिकट जारी किया ।

नई दिल्ली 8 मार्च (पी टी आई) मशहूर शायर-ओ-गीतकार साहिर लुधियानवी को आज उनके यौम पैदाइश के मौक़े पर ख़राज पेश किया गया और सदर जम्हूरिया प्रणब मुखर्जी ने उनकी याद में एक यादगार डाक टिकट जारी किया ।

सदर जम्हूरिया ने कहा कि साहिर आज भी अपने गीतों और शायरी की वजह से लोगों के दिलों में ज़िंदा हैं। राष्ट्रपति भवन में मुनाक़िदा तक़रीब में ख़िताब करते हुए प्रणब मुखर्जी ने वाज़िह किया कि साहिर लुधियानवी को अवामी शायर कहा जाता है जिन्होंने आम आदमी की ज़िंदगी के हर दिन पेश आने वाले वाक़ियात का पूरी गहराई के साथ जायज़ा लेकर इस का अपनी शायरी में अहाता किया है।

सदर जम्हूरिया ने कहा कि ख़ूबसूरती और मुहब्बत पर उन के गीतों की वजह से वो नौजवानों के शायर समझे जाते थे । उन्होंने अपने वक़्त में समाजी मसाइल और इक़दार का भी पूरी हस्सासीत के साथ अपने कलाम में अहाता किया है। साहिर लुधियानवी 8 मार्च 1921 को लुधियाना में पैदा हुए और उनका असली नाम अबदुल हई था। उन्हें शोहरत अपने तख़ल्लुस साहिर लुधियानवी से मिली।

1957 में गुरूदत्त की फ़िल्म प्यासा में उनके गीतों ने उन्हें शोहरत की बुलंदियों पर पहूँचा दिया था। आज़ादी के बाद मुल्क में पैदा हुए हालात पर उनकी नज्म `जिन्हें नाज़ है हिंद पर वो कहाँ हैं’ बहुत मशहूर हुई । आज मुनाक़िदा तक़रीब में प्रणब मुखर्जी ने कहा कि साहिर लुधियानवी की सब से बड़ी कामयाबी ये थी कि उन्हों ने उर्दू शायरी को फ़िल्मी गीतों का रंग दिया । उन्होंने कहा कि उन के इंतिक़ाल के 33 साल बाद भी उनका यौमे पैदाइश मनाया जाना और उनकी याद में डाक टिकट जारी किया जाता इस बात का सबूत है कि वो अपनी शायरी और गीतों से अवाम के दिलों में हनूज़ ज़िंदा हैं। तक़रीब में मर्कज़ी वज़ीर मुवासलात-ओ-इन्फॉर्मेशन टैक्नालोजी मिस्टर कपिल सिब्बल और मर्कज़ी वज़ीर इत्तिलाआत-ओ-नशरियात मिस्टर मनीष तिवारी ने भी शिरकत की। कपिल सिब्बल ने इस मौक़े पर साहिर लुधियानवी के कुछ अशआर भी सुनाए।

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